व्यापार के बहाने बनाए थे साझीदार
जांच में सामने आया था कि ऑनलाइन गेमिंग एप दानी दाता चीन के नागरिक वू उयानबे ने बनाया था। वह टूरिस्ट वीजा पर भारत आता था। चांदनी चौक में चीन का सामान बेचता था। संपर्क में बाजार के कई दुकानदार थे। उसने अंकित, सिद्धार्थ और विजय को अपना साझीदार बनाया। अंकित और विजय के नाम से फर्म बनाई। फर्म के नाम से खाता खोला। गेमिंग के जरिए जमा होने वाली रकम मर्चेंट के माध्यम से इन दोनों के खाते में पहुंचती थी। सिद्धार्थ रकम निकालता था। रकम की 25 प्रतिशत धनराशि तीनों अपने पास रखते थे। बाकी रकम वू उयानबे को मनी एक्सचेंजर से उपलब्ध करा दी जाती थी।
वह चीन में कहां का है, असली पता क्या है, यह आरोपियों को भी नहीं पता नहीं है। तमाम कोशिश के बाद भी पुलिस उसकी जानकारी नहीं जुटा सकी। गिरफ्तार तीनों आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल कर दिया। थाना सिकंदरा के प्रभारी निरीक्षक आनंद कुमार शाही का कहना है कि चीनी नागरिक के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। उसकी गिरफ्तारी के बाद अलग से चार्जशीट लगाई जाएगी। दानी दाता एप से ठगी के मामले में गुजरात और महाराष्ट्र में भी मुकदमे दर्ज हुए थे।
ज्यादा स्कोर पर कम रकम
दानी दाता एप प्ले स्टोर पर उपलब्ध था। मोबाइल पर डाउनलोड करने के बाद गेम शुरू होता था। शुरुआत से पहले एक निश्चित रकम प्लेयर को जमा करनी होती थी। यह रकम मर्चेंट के माध्यम से प्लेयर के खाते से दिल्ली की बैंक के खाते में जाती थी। एप एंटी स्कोरिंग बेट था, जिससे ज्यादा स्कोर होने पर कम धनराशि मिलती थी। कम स्कोर होने पर ज्यादा धनराशि मिलती थी।
केस दर्ज होते हैं...नहीं मिलती पीड़ितों को रकम
ऑनलाइन गेमिंग एप बनाकर लोगों से करोड़ों की ठगी की जा चुकी है। साइबर अपराधी भी धोखाधड़ी कर रहे हैं। आम लोगों के साथ-साथ चिकित्सक, व्यापारी, बेरोजगार, पुलिसकर्मी सभी शिकार बन चुके हैं। 1000 से लेकर एक करोड़ रुपये तक की ठगी की जा चुकी है। पुलिस केस तो दर्ज करती है लेकिन पीड़ितों को रकम वापस नहीं मिल पाती।
ईएमआई फ्री कार के नाम पर भी धोखाधड़ी
कई साल पहले आगरा में आईएमआई फ्री कार के नाम पर धोखाधड़ी की गई थी। आवास विकास कॉलोनी में कंपनी बनाकर संचालक ने लोगों से रकम जमा कराई थी। बताया गया था कि कार खरीद कर कंपनी में जोड़ दीजिए। किस्त की रकम कंपनी जमा करेगी। कुछ दिन बाद संचालक ने लोगों की किस्त जमा करना बंद कर दिया। सैकड़ों पीड़ित सामने आए। सिकंदरा पुलिस ने केस दर्ज किया था। संचालक जेल गया लेकिन पीड़ितों को रकम नहीं मिल सकी।