उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी (फाइल फोटो)
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री नारायणदत्त तिवारी का आगरा से खास लगाव था। आगरा के उद्योगों को उजाड़ने से बचाने के लिए उन्होंने लाठियां तक खाईं थीं। पुलिस ने उन्हें रकाबगंज थाने में हिरासत में लिया था।
इसके बाद उन्होंने यूथ हॉस्टल में तीन दिन तक मौन व्रत रखा था। ‘तिवारी कांग्रेस’ का गठन भी उन्होंने राजीव गांधी के हत्यारों की गिरफ्तारी नहीं करने के कारण किया था। आगरा के कांग्रेसियों में उनके निधन से शोक की लहर दौड़ गई।
वरिष्ठ कांग्रेसी नेता विष्णुदत्त शर्मा और तिवारी कांग्रेस के उपाध्यक्ष रहे वीरेंद्र गुप्ता ने बताया कि एनडी तिवारी ने पांच सितंबर 1995 को आगरा के उद्योगों को उजाड़ने से बचाने के लिए आगरा किला के पास हनुमान मंदिर पर जनसभा की थी।
तीन दिन तक किया था मौन व्रत
इसमें आगरा के उद्योगपतियों ने भी भाग लिया था। पुलिस ने कार्यकर्ताओं पर लाठियां भांजी और पानी की बौछार छोड़ी। इसमें एनडी तिवारी, विष्णुदत्त शर्मा, जीएस धर्मेश भी घायल हुए थे। तिवारी जी को रकाबगंज थाने लाया गया तो उन्होंने वहां खटिया बिछा ली थी।
घटना के विरोध में उन्होंने 20 सितंबर से तीन दिन तक यूथ हॉस्टल में मौन व्रत रखकर विरोध किया था। इसके बाद बिजलीघर पर हुई सभा में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह, मोहसिना किदवई ने भी भाग लिया था।
विष्णुदत्त ने बताया कि उनके योगदान को आगरा वाले कभी नहीं भुला सकेंगे। उन्होंने हमेशा आगरा की बेहतरी और तरक्की के बारे में सोचा था। वह जब भी आते थे, उनका व्यवहार मृदु रहता था। वह बेटा कहकर बुलाते थे।
शोक की लहर दौड़ी, अपूर्णनीय क्षति बताया
पूर्व मुख्यमंत्री नारायणदत्त तिवारी के निधन से कांग्रेस में शोक की लहर दौड़ गई। जिलाध्यक्ष दुष्यंत शर्मा, प्रदेश सचिव शब्बीर अब्बास, प्रदेश उपाध्यक्ष उपेंद्र सिंह, शहर अध्यक्ष हाजी अबरार, कार्यवाहक शहर अध्यक्ष हाजी जमील उद्दीन कुरैशी ने बताया कि आगरा के लिए उनका योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।