े19एमएनपी-20-जिला अस्पताल में स्ट्रेचर न मिलने पर पीठ पर मरीज को लादकर ले जाते परिजन
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मैनपुरी। जिला अस्पताल में बेहतर इलाज और सुविधाओं का दावा किया जाता है। हालांकि चिकित्सकों की कमी से बेहतर इलाज लोगों को नसीब नहीं हो रहा है। इसके साथ ही मूलभूत सुविधाओं की भी दरकार है। अस्पताल में मरीजों के तीमारदारों को खुद स्ट्रेचर खींचना पड़ता है। कभी-कभी तो स्ट्रेचर न मिलने पर तीमारदार मरीजों को गोद में लेकर घूमते नजर आते हैं। तीमारदारों की दशा पर न तो अस्पताल प्रशासन ध्यान दे रहा है और न ही वार्ड ब्वॉय। सोमवार को भी जिला अस्पताल में इसी तरह का नजारा नजर आया।
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पिता ने खींचा स्ट्रेचर
शहर के मोहल्ला नगरिया निवासी जानकी देवी को पेट दर्द होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सक ने अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी। सोमवार को पिता सर्वेश खुद बेटी को स्ट्रेचर पर बिठाकर महिला अस्पताल स्थित अल्ट्रासाउंड कक्ष तक ले गया। उनकी मदद के लिए न तो वार्ड ब्वॉय आगे आए और न ही अन्य किसी कर्मचारी ने मदद की।
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मां को पीठ पर लेकर आया बेटा
गांव देवामई निवासी सुनीता देवी के पैर में चोट लग गई थी। सोमवार को बेटा विनोद कुमार उन्हें इलाज के लिए अस्पताल लेकर आया। यहां स्ट्रेचर नहीं मिला। इधर उधर स्ट्रेचर की तलाश करके जब वह थक गया तो उसने अपनी मां को पीठ पर बिठा लिया और चिकित्सक के कक्ष तक पहुंचा। विनोद का कहना था कि क्या वार्ड ब्वॉय को वेतन बैठने का दिया जाता है। अफसरों को उनके कार्य की निगरानी करनी चाहिए।
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इमरजेंसी में नहीं मिला स्ट्रेचर
गांव जगतपुर निवासी चंद्रशेखर खपरैल से गिरकर घायल हो गया। परिजन सोमवार को इमरजेंसी में लेकर पहुंचे। यहां उसे प्राथमिक उपचार दे दिया गया। इसके बाद ओपीडी में इलाज लेने की सलाह दी गई। 60 वर्षीय चंद्रशेखर को यहां स्ट्रेचर नहीं मिला। बेटा दिनेश कुमार अन्य परिजनों की मदद से हाथ पकड़कर उन्हें ओपीडी के दस नंबर कक्ष तक ले गया।
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मरीजों को इमरजेंसी से वार्ड में शिफ्ट करने की जिम्मेदारी वार्ड ब्वॉय की है। यदि ब्वॉय के स्तर से लापरवाही की जा रही है तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।
डॉ. अरविंद कुमार गर्ग, सीएमएस