फर्जी जमानतदार लगाकर जेल से आया था बाहर
एसटीएफ की पूछताछ में सरगना फाती ने बताया कि लूट और डकैती करना खानदानी पेशा है। वह वारदात के बिना खा नहीं सकता है। जेल से बाहर आने के बाद नाम बदल लेता है। इसके लिए कागजात भी तैयार कराता है। उसके गैंग में घुमंतू जाति के अनगिनत लोग शामिल हैं। वह सदस्यों के परिवार सहित अलग राज्य के अलग-अलग जिलों में डेरा जमाकर रहते हैं।
गैंग में शामिल महिलाएं और पुरुष भीख मांगते हैं। थाली में भगवान की फोटो रखते हैं। इस दौरान ऐसे घरों को चिह्नित करते हैं, जो शहर से बाहरी इलाकों में होते हैं। रात में गैंग के 10-15 सदस्य जाकर लूट, हत्या, डकैती और दुष्कर्म की वारदात करते हैं। वारदात के बाद डेरे को कहीं और ले जाते हैं। हत्या करने वाले को ज्यादा पैसा मिलता था।
नए शहर में पहुंचते ही बदल लेता है नाम और पता
एसटीएफ का दावा है कि छैमार गिरोह दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, हरियाणा, झारखंड में सैकड़ों वारदात कर चुका है। उनके गैंग के किसी सदस्य के पकड़े जाने पर फर्जी जमानतदार लगाकर पैरवी करके छुड़ा लेते हैं। सदस्यों के पास अलग नाम और पते के आधार कार्ड, वोटर आईडी भी होती हैं।
आरोपी फाती किसी शहर में जाते ही अपना नाम बदल लेता है। इसके लिए उस जिले का आधार कार्ड भी फर्जी बना लेता है। इससे पुलिस के पकड़ने पर भी उसकी असलियत का पता नहीं चलता है। वह सैकड़ों की संख्या में हत्या कर चुका है। मगर, 15 मुकदमों की ही जानकारी पुलिस को मिली है। इनमें अलवर, सुल्तानपुर, औरैया, फतेहपुर, जौनपुर, कानपुर, हनुमानगढ़, लखनऊ और आगरा में मुकदमे दर्ज हैं।
कई बार हत्या और लूट की वारदात का खुलासा नहीं हो पाता है। इस कारण फाती बच जाता है। उसे खुद याद नहीं है कि कितनी वारदात कर चुका है। सभी मुकदमों में उसके नाम भी अलग हैं। एसटीएफ आरोपी पर दर्ज अन्य मुकदमों की जानकारी कर रही है।