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एटा: अस्पताल में बीमार बुजुर्ग बंदी को बेड़ी से बांधने वाला बंदी रक्षक बर्खास्त

Sun, 16 May 2021 10:21 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, एटा

सार

अस्पताल में भर्ती बुजुर्ग बंदी की तस्वीर सोशल मीडिया में वायरल हुई थी। इसमें वह बेड़ी से बंधा दिखाई दे रहा है। जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन स्तर से बंदी रक्षक को बर्खास्त कर दिया गया। 
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बीमार वृद्ध कैदी को बेड़ियों में जकड़ा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एटा के अस्पताल में सजायाफ्ता बुजुर्ग बंदी को बेड पर बेड़ी से बांधने के मामले में बंदीरक्षक अशोक कुमार यादव को दोषी पाया गया। एटा की जेल के अधीक्षक ने बंदीरक्षक के खिलाफ अपनी जांच रिपोर्ट केंद्रीय जेल के वरिष्ठ अधीक्षक वीके सिंह को भेजी थी। वरिष्ठ अधीक्षक ने बंदीरक्षक को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। 

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एटा के थाना सकीट, गांव कुल्ला हबीबपुर निवासी 84 साल के बाबूराम प्रधान को हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा हुई है। बंदी को छह फरवरी को जिला जेल एटा में निरुद्ध किया गया था। नौ मई को तबीयत खराब होने पर जेल के अस्पताल में भर्ती किया गया।  

बेड़ी से बेड पर बांधा था 
सांस लेने में दिक्कत होने की शिकायत पर बंदी बाबूराम प्रधान को अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। मेडिकल कॉलेज में बेड उपलब्ध नहीं होने पर बंदी को वापस एटा जिला अस्पताल में भर्ती कराया। बंदी के एक पैर को बेड़ी से बेड पर बांधा गया था। इसका फोटो इंटरनेट मीडिया पर दो दिन पहले वायरल हुआ था। 
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एटा जेल अधीक्षक ने बंदीरक्षक को लापरवाही बरतने के आरोप में निलंबित कर दिया था। मामले में बंदी रक्षक का भी बयान लिया गया। रिपोर्ट केंद्रीय जेल के वरिष्ठ अधीक्षक को भेजी। वरिष्ठ अधीक्षक वीके सिंह ने बताया कि बंदीरक्षक का कृत्य मानवाधिकार और मूल अधिकार के हनन का था। इस पर उसको जांच में दोषी पाते हुए बर्खास्त कर दिया।

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हत्या के मामले में मिली आजीवन कारावास की सजा 
थाना सकीट के गांव कुल्ला हबीबपुर निवासी 90 वर्षीय बाबूराम हत्या के मामले में जिला कारागार में सजा काट रहा है। बाबूराम ने 1982 में एक व्यक्ति का अपहरण के बाद हत्या कर दी थी। इस मामले में 1997 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद अपील पर पैरोल मिल गई। 2020 में अपील खारिज कर दी गई और हाजिर नहीं होने पर कुर्की के आदेश हो गए। करीब तीन माह पहले बाबूराम ने खुद को हाजिर कर दिया, तभी से जेल में है। 


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