मान्यता है कि त्रेता युग में भगवान राम के विवाह के दौरान जनकपुर की महिलाओं ने प्रेम पगी गालियां सुनाईं। इसी प्रकार द्वापर में भी बरसाना की महिलाओं द्वारा ठाकुर जी को गालियां सुनाने का उल्लेख मिलता है।
ब्रज के बारे में एक कहावत है कि बोलंत हेला, वचनंत गारी
भक्ति काल के तमाम कवियों ने इन गालियों को अपने काव्य में पिरोया है। ब्रज में सगाई, लग्न, विवाह जैसे मांगलिक कार्यों में आज भी गालियों का प्रयोग महिलाओं द्वारा किया जाता है।
नंदगांव-बरसाना में भी ये प्रथाएं देखने को मिलती हैं। नंदगांव राधा जी की ससुराल है। ऐसे में राधाष्टमी एवं होली के अवसर पर बरसाना के लोगों द्वारा प्रेम पगी गालियां कृष्ण को सुनाई जाती हैं।
गावैं दै दै तारियां हो ब्रज की नारियां सुकुमारि
लाला तेरी बहन छैल छिनकारी याकी श्रीदामा ते यारी
नंद नंदन तेरी भूआ जाकें क्वारी के सुत हुआ।
नंद नंदन तेरी काकी वह तौ काम कला में पाकी।