डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय प्रशासन बीएड सत्र 2004-05 की एसआईटी (विशेष जांच दल) की सूची के आधार पर प्राप्त 814 अभ्यर्थियों के प्रत्यावेदन के निस्तारण की तैयारी में है। इसके लिए इसी हफ्ते कमेटी का गठन किया जाना है। सदस्यों के नामों पर चर्चा चल रही है। निर्धारित समय के अंदर प्रकरण का निस्तारण किया जाना है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने एसआईटी की ओर से तैयार फर्जी प्रमाणपत्र वाले अभ्यर्थियों की सूची वेबसाइट पर सार्वजनिक की थी। इसके आधार पर 20 से भी कम अभ्यर्थियों ने निर्धारित प्रोफार्मा पर सभी जानकारियां दी हैं। विभिन्न माध्यमों से विश्वविद्यालय को कुल 814 प्रत्यावेदन मिले थे।
इनको छोड़कर प्रत्यावेदन न देने वाले 2823 अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों को विवि ने फर्जी घोषित कर दिया था। जिसको हाईकोर्ट ने भी फर्जी मान लिया। वहीं, प्रत्यावेदन देने वाले 814 अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों पर तीन माह के अंदर निर्णय लेने का आदेश दिया था। आदेश आए माह से अधिक समय बीत चुका है।
कुलपति प्रो. अशोक मित्तल का कहना है कि लॉकडाउन में विश्वविद्यालय बंद होने से प्रत्यावेदनों की जांच नहीं कराई जा सकी। इसी हफ्ते जांच कमेटी बना दी जाएगी। हाईकोर्ट की ओर से दिए गए समय के अंदर ही 814 अभ्यर्थियों पर निर्णय ले लिया जाएगा।
जांच पूरी होने के बाद बड़ी संख्या में शिक्षकों पर होगी कार्रवाई
विश्वविद्यालय की ओर से फर्जी घोषित किए गए 2823 अभ्यर्थियों की सूची के आधार पर बेसिक शिक्षा विभाग ने जिले में 24 शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया है। जबकि एसआईटी फर्जी अभ्यर्थियों की सूची से जिले में 195 शिक्षक चिह्नित किए गए हैं।
171 शिक्षकों के नाम विश्वविद्यालय को प्रत्यावेदन देने वाले 814 अभ्यर्थियों की सूची में शामिल होने की उम्मीद है। जांच पूरी होने के बाद बड़ी संख्या में शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई होनी है।
बर्खास्तगी के 20 दिन बाद भी एफआईआर नहीं
जिले में फर्जी प्रमाणपत्र वाले 24 फर्जी शिक्षकों को बर्खास्त किए हुए 20 दिन हो गए। किसी भी खंड शिक्षा अधिकारी ने शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर कराने की रिपोर्ट बेसिक शिक्षा अधिकारी को नहीं दी है। वेतन रिकवरी की भी कार्रवाई होनी है। जबकि खंड शिक्षा अधिकारियों को एक बार रिमाइंडर भी भेजा जा चुका है।
बेसिक शिक्षा अधिकारी राजीव कुमार यादव का कहना है कि खंड शिक्षा अधिकारियों को दूसरा रिमाइंडर भेजा जा रहा है। इसके बाद भी कार्रवाई नहीं की जाती है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई के लिए भी लिखा जाएगा। बेसिक शिक्षा निदेशक की ओर से एक जून को बेसिक शिक्षा अधिकारी को पत्र जारी कर प्रकरण की प्रगति पूछी गई है। रिपोर्ट न मिलने पर नाराजगी भी जताई है।