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भारत रत्न का आंगनः मुख्यमंत्रीजी...उम्मीदें लगाए बैठा है अटल का बटेश्वर, 'विकास की ईंट' कर रही इंतजार

Sat, 25 Dec 2021 12:06 AM IST
Abhishek Saxena संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 1976 में कहा था कि बटेश्वर के कण-कण में इतिहास समाया है। प्रत्येक हिस्से में
भूतकाल निद्रा निमग्न है। जरूरत है इसके संरक्षण की। आजादी के आंदोलन के दस्तावेज में दर्ज अटल का बटेश्वर मुख्यमंत्री योगी
आदित्यनाथ के आगमन पर उम्मीदें लगाए बैठा है। बदहाल बटेश्वर के कायाकल्प का लोगों को इंतजार है।
 
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अटल बिहारी वाजपेयी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हटें अटल के आंगन के बबूल, बने स्मारक

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अस्थि कलश विसर्जन के वक्त अटलजी के खंडहर की सफाई हुई थी। उनके घर के आंगन को बबूल के पेड़ों ने फिर से घेर लिया है। विकास के नाम पर यहां पर एक ईंट नहीं लगी है। अटलजी की पाठशाला भी उपेक्षित पड़ी है। उपेक्षा से आहत यहां के लोग चाहते हैं कि अटलजी के घर के बबूल हटें, इसे स्मारक के रूप में विकसित किया जाये।
पर्यटन कांपलेक्स का हो जीर्णोद्धार
बटेश्वर आने वाले पर्यटकों के लिए 6 अप्रैल 1999 में अटलजी ने राही पर्यटन कांपलेक्स का लोकार्पण किया था। अब कांपलेक्स के दरवाजे, खिड़की, शीशे टूटे पड़े हैं। टायलेट, कमरों की दीवारें दरक गई हैं। खंडहर में तब्दील हो रहे पर्यटन कांपलेक्स का जीर्णोद्धार हो तो यहा पर्यटक ठहरें और पर्यटन को बढ़ावा मिले।
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बटेश्वर हॉल्ट बने अटल स्टेशन
24 दिसंबर 2015 में आगरा-इटावा वाया बटेश्वर रेल लाइन का उद्घाटन राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने किया था। अटलजी ने 6 अप्रैल 1999 में इसकी आधार शिला रखी थी। छह साल बीत गये। बटेश्वर हॉल्ट अंधेरे में है, पीने का पानी तक मयस्सर नहीं है। लोग चाहते हैं कि ट्रेनों की संख्या बढे़ और इसे अटल स्टेशन का दर्जा मिले।

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अटल बिहारी वाजपेयी के पैतृक घर के अवशेष - फोटो : अमर उजाला
जंगलात कोठी में बने संग्रहालय
अटलजी की अस्थि विसर्जन के लिए मुख्यमंत्री योगी बटेश्वर आये थे तो जंगलात कोठी को अतिक्रमण मुक्त कराया गया था। अब फिर से जंगलात कोठी की दीवार पर कंडे थापे जा रहे हैं। 1942 में महात्मा गांधी के ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ आंदोलन से प्रभावित होकर अटल समेत 300 देशभक्तों ने जंगलात कोठी पर राष्ट्रीय ध्वज फहरा कर खुद को आजाद घोषित कर दिया था। इसे संग्रहालय बनाया जाए।
सांस्कृतिक प्रेक्षागृह की बदहाली दूर हो
बटेश्वर में संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए सांस्कृतिक प्रेक्षागृह का निर्माण कराया गया था। 20 साल में कोई कार्यक्रम नहीं हुआ। प्रेक्षागृह खंडहर में तब्दील हो गया है। यह अतिक्रमण की जद में है। लोग चाहते हैं कि सांस्कृतिक प्रेक्षा गृह की बदहाली दूर हो। 
 
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