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नूरजहां की सराय: सिसक रहे खंडहर, दीवारों में गहरी दरारें; बदहाली का शिकार 500 साल पुराना स्मारक

Tue, 31 Mar 2026 05:18 PM IST
Arun Parashar देश दीपक तिवारी, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

यमुना किनारे खड़े इस स्मारक में दो विशाल द्वार हैं। मुख्य प्रवेश द्वार के भीतर कभी पक्की दुकानों का सुव्यवस्थित बाजार सजा करता था। आज एक तरफ की 28 दुकानें जैसे-तैसे खड़ी हैं, लेकिन दूसरी तरफ का ढांचा पूरी तरह जमींदोज होकर मलबे में बदल चुका है। 
 
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नूरजहां की सराय। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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जहां कभी मुसाफिरों की चहल-पहल थी, व्यापारियों के ऊंट-घोड़े सुस्ताते थे और बाजार की रौनक देखते ही बनती थी, आज उस नूरजहां की सराय स्मारक पर सन्नाटा और बदहाली का पहरा है। रामबाग स्थित यह ऐतिहासिक धरोहर अब वक्त की गर्द में मिलकर गुम हो रही है। इस संरक्षित धरोहर पर सरकारी उपेक्षा की ऐसी मार पड़ी है कि विरासत धीरे-धीरे मलबे में तब्दील हो गई। इसके खंडहर सिसक रहे हैं और दीवारों की गहरी दरारें चीख-चीखकर अपने वजूद की गुहार लगा रही हैं।
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खंडहरों में तब्दील हुआ यादों का बाजार
रामबाग चौराहे से महज 300 मीटर दूर हाथरस रोड पर स्थित हनुमान मंदिर के बगल वाली गली इस ऐतिहासिक सफर की गवाह है। सोमवार को जब अमर उजाला की टीम ने धरातल पर पड़ताल की, तो नजारा भयावह मिला। यमुना किनारे खड़े इस स्मारक में दो विशाल द्वार हैं। मुख्य प्रवेश द्वार के भीतर कभी पक्की दुकानों का सुव्यवस्थित बाजार सजा करता था। आज एक तरफ की 28 दुकानें जैसे-तैसे खड़ी हैं, लेकिन दूसरी तरफ का ढांचा पूरी तरह जमींदोज होकर मलबे में बदल चुका है। यमुना तट पर बना इसका दूसरा गेट और घोड़ों का अस्तबल अब केवल इतिहास की किताबों के पन्ने में नजर आता हैं।

नूरजहां की निशानी, संरक्षण के खोखले दावे
एप्रूव्ड टूरिस्ट गाइड एसोसिएशन के अध्यक्ष शमसुद्दीन खान बताते हैं कि यह स्मारक मुगलिया सल्तनत के रिवर फ्रंट का अहम हिस्सा था। नूरजहां के शासनकाल में निर्मित इस सराय में कभी देश-दुनिया के व्यापारी और राहगीर पनाह लेते थे। अफसोस कि 500 साल पुरानी इस अनमोल विरासत की सुध लेने वाला कोई नहीं है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण के दावे यहां धरातल पर पूरी तरह खोखले नजर आते हैं।
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650 साल पुराना शिव मंदिर भी बदहाल
सराय के परिसर में एक अत्यंत प्राचीन शिव मंदिर भी मौजूद है। मंदिर के बाहर लगे बीजक के अनुसार, यह शिवालय 650 साल पुराना है। समय-समय पर लोगों ने व्यक्तिगत स्तर पर इसका जीर्णोद्धार तो कराया, लेकिन पूरे स्मारक परिसर की बदहाली ने इस आध्यात्मिक और ऐतिहासिक केंद्र को गुमनामी के अंधेरे में धकेल दिया है। उखड़े बोर्ड और टूटते पत्थर विरासत के प्रति विभाग की संवेदनहीनता की गवाही दे रहे हैं।

ये बोले जिम्मेदार
नूरजहां सराय स्मारक के निरीक्षण के लिए जल्द ही एक विशेष टीम भेजी जाएगी। स्मारक के संरक्षण के लिए आवश्यक दस्तावेज तैयार कराए जा रहे हैं। इसका जल्द ही जीर्णोद्धार कार्य शुरू कराया जाएगा। -स्मिथा एस. कुमार, अधीक्षण पुरातत्वविद, एएसआई
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