आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताले लटके हुए हैं। कार्यकर्ता घर से पुष्टाहार वितरण कर रही हैं। सप्ताह में दो दिन पढ़ाई होती है और बाकी चार दिन संक्रामक रोगों के सर्वे से लेकर बच्चों का टीकाकरण, बीएलओ सर्वे आदि कार्य कार्यकर्ताओं से लिए जा रहे हैं। जिले में 700 से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के पद रिक्त पड़े हैं।
नई शिक्षा नीति के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों में छह साल से कम उम्र के बच्चों को बेसिक शिक्षा का प्रावधान है। कोरोना के बाद आंगनबाड़ी केंद्रों पर पढ़ाई से लेकर पुष्टाहार वितरण का ढर्रा बदल गया है। जिले में 3 हजार से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के पद हैं। इनके सापेक्ष 2300 ही कार्यरत हैं। 15 ब्लॉक में केवल दो सुपरवाइजर (सीडीपीओ) है। सीडीओ ए मनिकन्डन ने बताया कि तीन नए सीडीपीओ की तैनाती हो गई है। प्रत्येक सीडीपीओ पर तीन ब्लॉक का चार्ज रहेगा। रिक्त पदों की भर्ती के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है।
4 अक्टूबर से शुरू हुआ वितरण
मोहल्ला ताल व नगला धीर में सात आंगनबाड़ी केंद्र हैं। चार केंद्रों के भवन दो दिन खुल रहे हैं, जबकि तीन केंद्रों के लाभार्थियों को पुष्टाहार वितरण कार्यकर्ता घर से कर रही हैं। किरावली के नगला मंसा गोपऊ गांव में आंगनबाड़ी केंद्र पर बृहस्पतिवार को ताला लटका मिला। ग्रामीण महेंद्र सिंह ने बताया कि एक महीने से पुष्टाहार नहीं बांटा गया है। वहीं शमसाबाद के ग्राम लखुरानी में प्राथमिक विद्यालय में बने आंगनबाड़ी केंद्र की इमारत जर्जर है। गांव की दुर्गेश ने बताया है कि यदि घर में ढाई साल से कम उम्र के तीन बच्चे हैं तो भी पुष्टाहार सिर्फ एक ही बच्चे का मिलता है।
पद भरने की चल रही प्रक्रिया
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के 700 से अधिक पद रिक्त हैं। उन्हें भरने की प्रक्रिया चल रही है। सप्ताह में सोमवार व बृहस्पतिवार दो दिन केंद्र खुल रहे हैं।
- साहब सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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