यह है मान्यता
डेढ़ सौ वर्ष पूर्व राजस्थान से आए जयराम बाबा ने यहां रहकर कठिन तपस्या कर हनुमानजी की सिद्धि प्राप्त की थी। मान्यता है कि हनुमान जी पर चोला चढ़ाकर प्रसाद भोग लगाने से श्रद्धालुओं को मनवांछित फल की प्राप्ति होती है।
प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पूजन दर्शन के लिए आते हैं। श्रद्धालु पूजन के बाद यहां बैठकर रामनाम लेखन का कार्य अवश्य करते हैं। मंदिर परिसर में रामनाम लेखन का संग्रहालय मौजूद है। वर्तमान में पंडित घनश्याम शास्त्री इस मंदिर में सेवा पूजा का कार्य नियमित रूप से करते हैं।
योगेश्वर मंदिर के सेवायत पंडित घनश्याम शास्त्री ने बताया कि निस्वार्थ भाव से मंदिर में सेवा कार्य करने वाले को परम संतोष व सुख की प्राप्ति होती है। यह अत्यंत पौराणिक मंदिर सरकार की उपेक्षा का दंश झेल रहा है।
सराफा कारोबारी गिर्राज किशोर ने कहा कि उत्तर प्रदेश के विभिन्न तीर्थों को अध्यात्म परिपथ से जोड़कर सरकार विकास का रोडमैप तैयार कर रहीं हैं। परंतु दुख है इस प्रमुख तीर्थस्थल को इस योजना से अछूता रखा गया है।