जिला कोरोना मुक्त है, लेकिन इसके बाद भी कहीं न कहीं छात्र छात्राओं पर कोरोना महामारी का मानसिक दबाव देखने को मिल रहा है। स्कूलों में जो छात्र संख्या कोरोना महामारी से पूर्व में दिखाई देती थी, वह छात्र संख्या वर्तमान समय में नहीं दिखाई दे रही है। केवल छात्र ही नहीं कुछ अभिभावक आज भी अपने बच्चों को कोरोना महामारी के भय के चलते स्कूल नहीं भेजना चाहते हैं। वहीं, जो छात्र स्कूलों में पहुंच रहे हैं वे भी भीड़भाड़ से बचते दिखते हैं। स्कूलों और कॉलेजों में भी छात्र छात्राओं को मानसिक रूप से मजबूत करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। अभिभावक भी बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। छात्र छात्राओं के खानपान पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
30 प्रतिशत छात्र छात्राएं अभी भी नहीं पहुंच रहे हैं स्कूल
कोरोना महामारी का ही असर है कि 30 प्रतिशत छात्र छात्राओं के अभिभावक मानसिक रूप से अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार नहीं हैं। सरकारी स्कूलों में दर्ज आंकड़ों के अनुसार 30 प्रतिशत छात्र छात्राएं ऑनलाइन पढ़ाई ही करना चाहते हैं। विद्यालयों में बचाव के उपाय होने के बाद भी छात्र छात्राएं मानसिक रूप से कोरोना महामारी को लेकर दबाव महसूस कर रहे हैं। इनके अभिभावक भी बच्चों को स्कूल भेजने को तैयार नहीं हैं।
बच्चों का मनोबल बढ़ाएं
शिक्षा सदन इंटर कॉलेज कुचेला के पूर्व प्रधानाचार्य राजभान सिंह चौहान ने बताया कि सरकार कोरोना की रोकथाम के लिए सभी प्रकार के प्रयास कर रही है। कॉलेजों और स्कूलों में भी सामाजिक दूरी का पालन कराते हुए बच्चों को समय समय पर सैनिटाइज कराया जा रहा है। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों का मनोबल बढ़ाएं। बच्चे मानसिक रूप से पढ़ाई के लिए तैयार हों। अब कोरोना की गति पूरी तरह से जिले में मंद हो चुकी है। सुरक्षा गाइड लाइन का पालन करते रहें मानसिक रूप से दबाव लेने की जरूरत नहीं है।
बीएनएल सीनियर सेकेंडरी स्कूल की प्रधानाचार्य डॉ. नीनेश कुमारी ने बताया कि छात्र छात्राओं को किसी प्रकार से चिंतित होने की जरूरत नहीं है। स्कूलों में कोरोना से बचाव के पूरे इंतजाम हैं। सरकार द्वारा भी 12 साल से अधिक उम्र के बच्चों का टीकाकरण कराया गया है। अभिभावक बिना किसी मानसिक दबाव के बच्चों को स्कूल भेजें। कोरोना का भय मन से निकाल दें। बच्चों की दो साल में जो पढ़ाई प्रभावित हुई है उसको हासिल करने के लिए प्रेरित करें।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक दुबे ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग बच्चों को लेकर पूरी तरह से सजग है। 12 साल से अधिक उम्र के छात्र छात्राओं का टीकाकरण कराया जा रहा है। सभी अभिभावक इसमें सहयोग करें। बच्चों पर किसी प्रकार का मानसिक दबाव न बनाएं। बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करें। कोरोना का खतरा कम हो गया है। मानसिक रूप से खुश रहेंगे तो बीमारी के लक्षण भी आने का खतरा कम रहेगा।