आगरा में बृहस्पतिवार स्मॉग की घनी चादर छाई तो दोपहर धूप निकली, लेकिन दोपहर तीन बजे के बाद मौसम का मिजाज एकदम बदल गया। बादलों के छाने के साथ सिकंदरा क्षेत्र में बारिश शुरू हो गई।
दोपहर में हालांकि बूंदाबांदी ही हुई, लेकिन शाम छह बजे तेज बारिश शुरू हो गई। इस दौरान 2.4 मिमी बारिश रिकार्ड की गई। इससे सर्दी बढ़ गई। बारिश के साथ ही बादल तेजी से गरजे और बिजली भी कड़कती रही।
शाम को एकाएक बदले मौसम के मिजाज के बीच हवाएं 28 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलीं। बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान 26.2 डिग्री रहा तो न्यूनतम तापमान सामान्य से छह डिग्री सेल्सियस ज्यादा 17.1 डिग्री पर पहुंच गया।
ऐसा रहेगा मौसम
मौसम विभाग के पूर्वानुमान केंद्र के मुताबिक अगले दो दिनों में बादलों की लुकाछिपी बनी रह सकती है। दिन भर धुंध छाई रहने के आसार हैं, वहीं दिन के तापमान में भी कमी आ सकती है। कमोवेश ऐसा ही मौसम मथुरा और फिरोजाबाद में रहा। मथुरा के कुछ इलाकों में ओलावृष्टि भी हुई।
आगरा के जिला कृषि अधिकारी डॉ. रामप्रवेश वर्मा बताते हैं कि पानी और ओला पड़ने से उन फसलों को नुकसान है, जो किसानों ने दो-तीन दिन पहले ही बुवाई की है। आलू, सरसों समेत दलहन-तिलहन फसलों को इससे कोई नुकसान नहीं है।
बारिश से हट गई पत्तियों, ताज से धूल
धूल कणों से परेशान आगरा में बृहस्पतिवार को इस सीजन की पहली बारिश हुई। पश्चिमी विक्षोभ के कारण हुई बारिश के कारण सबसे ज्यादा राहत नगर निगम को मिली, जो खराब एयर क्वालिटी के दौरान शहर की सड़कों के किनारे लगे पौधों की पत्तियों पर जमा धूल कण हटाने के लिए पानी से धुलाई करा रहा था।
बारिश से शहर भर में पौधों पर जमा धूल मिट्टी साफ हो गई और ताज समेत स्मारकों के गुंबद और छत पर जमा धूल कण पानी में बह गए। इसके अलावा सड़क किनारे जमा धूल भी पानी में दब गई।
धुंध गहराने से तीसरा सबसे प्रदूषित शहर रहा आगरा
आगरा प्रदेश का तीसरा सबसे प्रदूषित शहर रहा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी सूचकांक में बृहस्पतिवार को आगरा का एयर क्वालिटी इंडेक्स (वायु गुणवत्ता सूचकांक) 205 पर पहुंच गया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तेज हवाएं चलने और सामान्य से ज्यादा तापमान होने के कारण धूल कणों और स्मॉग से राहत मिली।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बागपत, मेरठ, बुलंद शहर, मेरठ, नोएडा, गाजियाबाद की वायु गुणवत्ता आगरा से बेहतर रही। ताजनगरी में धूल कणों की मात्रा अधिकतम 349 पर रही, जबकि कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा मानक से 40 गुना ज्यादा 160 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच गई।