आगरा में यमुना बैराज का मुद्दा सबसे पहले 1975 में उठा था। तब शहर को जल संकट से निजात दिलाने के लिए बैराज बनाए जाने की मांग की गई। कभी सिंचाई विभाग के अफसरों ने कह दिया कि बैराज से बाढ़ का खतरा बनेगा तो कभी इसमें उलझ गया कि यमुना की डाउन स्ट्रीम में बने या अपस्ट्रीम में।
समाजवादी पार्टी की अखिलेश सरकार के दौरान बैराज की डीपीआर बनी। योगी सरकार ने नए सिरे से डीपीआर बनवाई। यह प्रस्ताव रबर चेकडैम का है। बजट तय हुआ 350 करोड़ रुपये, लेकिन इससे आगे बात न बनी।
पहला शिलान्यास : मनोहरपुर में वर्ष 1986-87 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने बैराज का शिलान्यास किया था।
दूसरा शिलान्यास : 1993 में तत्कालीन राज्यपाल रोमेश भंडारी ने बहादुरपुर और मनोहरपुर के बीच में बैराज का शिलान्यास किया।
तीसरा शिलान्यास : 26 अक्तूबर, 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्ट्रीम में नगला पैमा में रबर चेकडैम का शिलान्यास किया।
'जनप्रनिधियों की एक राय न होने के कारण नहीं बना'
नेशनल चेंबर के पूर्व अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की अलग-अलग राय के कारण कभी बैराज पोइया घाट, तो कभी ताजमहल के पास बनाने की बात चली। इसके बाद सिकंदरा पर इसके निर्माण की बात कही गई। स्थान बदलते रहे, लेकिन बैराज का निर्माण नहीं हो सका। पर्यावरण विशेषज्ञों की अलग-अलग राय और जनप्रतिनिधियों की सिर्फ बातों के कारण शहर के लोगों को एक बार फिर निराशा हाथ लगी।
ताज के लिए जरूरी है रबर डैम
सुप्रीम कोर्ट की अनुश्रवण समिति के सदस्य रमन ने कहा कि ताजमहल की चारों ओर की नींव लकड़ी के खंभों पर है। ऐसे में ताज को सुरक्षित बनाए रखने के लिए नींव की लकड़ियों में नमी का होना काफी जरूरी हो जाता है। यही कारण है कि ताज की नींव में पांच इंच से लेकर छह इंच तक की दरारें आ चुकी हैं। जितनी जल्द ताज के पीछे रबर डैम बनेगा, उतना ही ताजमहल के लिए यह उपयुक्त रहेगा।
फाइलों से बाहर न निकला बैराज
रिवर कनेक्ट मुहिम के अध्यक्ष ब्रज खंडेलवाल ने कहा कि कभी बैराज तो कभी डैम, नाम बदले लेकिन बना कुछ नहीं। जनप्रतिनिधियों को एकजुट होकर प्रयास करने चाहिए। हम छह साल से रिवर कनेक्ट मुहिम चला रहे हैं। इसका मकसद यही है कि यमुना में पानी रहे जो स्वच्छ हो। इसके लिए बैराज जरूरी है लेकिन यह फाइलों से बाहर नहीं निकल रहा है। पुरातत्व विभाग और सेंट्रल वॉटर कमीशन ने पहले ही एनओसी दे दी है।
पैसा आया, वापस चला गया
- 1993 में केंद्रीय जल आयोग ने बैराज के लिए 134.8 करोड़ स्वीकृत किए थे लेकिन काम नहीं हुआ। पैसा वापस गया।
- पर्यावरण मंत्रालय ने वर्ष 1999 में आगरा बैराज की स्वीकृति दी थी। 24 अगस्त, 2001 को यह स्वीकृति इस आधार पर निरस्त कर दी गई कि बैराज बनने से जल की गुणवत्ता खराब हो जाएगी।
- 2001-02 में सिंचाई विभाग को 16 करोड़ जारी कर दिए गए। 4.84 करोड़ रुपये सिंचाई विभाग ने खर्च कर दिए थे। ताज ट्रेपेजियम जोन के अंतर्गत बैराज नहीं बनने का फैसला होने पर बाकी रकम वापस कर दी गई।
- इसके बाद दो बार डीपीआर बनी, पहले अखिलेश सरकार और फिर योगी सरकार ने बनवाई लेकिन अभी तक बैराज का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है।