एमकॉम में प्रवेश नहीं ले पाने पर परेशान छात्रा ने राज्यपाल को मार्मिक पत्र लिखा है। उसने अपील की है कि किसी भी तरह परीक्षा परिणाम घोषित करा दिया जाए, जिससे आगे की पढ़ाई वो कर सके।
परीक्षा परिणाम नहीं निकलने से छात्रा एमकॉम में प्रवेश नहीं ले पा रही है। विश्विद्यालय में सुनवाई नहीं होने पर उसने अंतिम उम्मीद के तौर पर राज्यपाल को मार्मिक पत्र लिखा है। छात्रा ने लिखा कि हाथ जोड़कर, पैर पकड़कर विनती है कि मेरा परीक्षा परिणाम घोषित करा दें, वरना भविष्य बर्बाद हो जाएगा।
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नॉर्थ विजय नगर कॉलोनी निवासी अनुराधा सिंह का कहना है कि विश्वविद्यालय के दाऊदयाल वोकेशनल संस्थान से बीकॉम वोकेशनल सेमेस्टर-6 की परीक्षा मई 2023 में दी थी। इसका परिणाम दिसंबर 2023 में जारी हुआ। मेरा परिणाम जारी नहीं हुआ, विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर प्लीज इंटर करेक्ट इनफार्मेशन और रिकाॅर्ड नॉट फाउंड लिखा आ रहा है। ऐसा कई छात्रों के साथ है।
इससे बीते सत्र एमकॉम में प्रवेश नहीं ले पाई हूं। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने से प्राइवेट नौकरी करनी पड़ रही है। छुट्टी लेकर कई बार विश्वविद्यालय के चक्कर काट चुकी हूं, अधिकारियों से भी मिली, लेकिन परीक्षा परिणाम नहीं घोषित हुआ। एमकॉम में प्रवेश के फाॅर्म निकले हैं, ऐसे में परिणाम नहीं निकला तो ये साल भी खराब हो जाएगा। जनसुनवाई पोर्टल पर भी शिकायत की है।
परिणाम कैसे रुका, कराऊंगा जांच
परीक्षा नियंत्रक डॉ. ओमप्रकाश का कहना है कि छात्रा का परिणाम कैसे नहीं जारी हुआ, इसका पता करवाता हूं। कोई तकनीकी दिक्कत रही होगी। छात्रा परीक्षा कार्यालय में संपर्क कर सकती है।
विद्यार्थियों को होना पड़ रहा परेशान
डिग्री-अंकतालिका के लिए विश्वविद्यालय में छात्र-छात्राओं को परेशान होना पड़ रहा है। यहां बीते सत्रों में परीक्षा परिणाम, डिग्री, अंकतालिका नहीं मिलने पर आत्मदाह की चेतावनी तक दी जा चुकी है।
प्रवेश, परीक्षा और परिणाम में पिछड़ा विश्वविद्यालय
विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष गौरव शर्मा का कहना है कि डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय प्रवेश, परीक्षा और परिणाम समय पर जारी करने में पिछड़ा है। 10 साल से यही हाल है। यहां 2015-2022 तक की 1.23 लाख डिग्रियां लंबित हैं। कई पाठ्यक्रमों का परिणाम नहीं जारी हुआ है। विश्वविद्यालय में कार्यप्रणाली से राज्यपाल भी खफा हैं। 5 मार्च को दीक्षांत समारोह में आईं राज्यपाल ने प्रवेश, परीक्षा, परिणाम समय पर जारी करने और छात्र-छात्राओं को डिग्री, अंकतालिका जैसी परेशानियों को दूर करने के लिए विश्वविद्यालय के अधिकारियों को सख्त हिदायत भी दी थी।