फिर सोने के भाव में ऑक्सीजन खरीदने की क्या जरूरत पड़ गई। पीड़ितों का आरोप है कि प्रशासन ने जांच रिपोर्ट को तोड़ मरोड़कर प्रस्तुत किया है। संचालक को बचाने और ऑक्सीजन की कमी छिपाने के लिए जांच में लीपापोती की गई है।
क्यों की गई ऑक्सीजन लेवल से छेड़छाड़
श्री पारस अस्पताल संचालक डॉ. अरिंजय जैन ने मॉकड्रिल के नाम पर मरीजों को दी जा रही ऑक्सीजन की खपत जांचने की बात कुबूली है। अमर उजाला पड़ताल में डॉ. अरिंजय ने बताया कि उसने अधिक ऑक्सीजन पर निर्भर मरीजों का ऑक्सीजन लेवल कम कर देखा।
सवाल है कि अगर ऑक्सीजन कमी नहीं थी तो फिर क्यों मरीजों के ऑक्सीजन लेवल से छेड़छाड़ की गई। जो मरीज हाई फ्लो ऑक्सीजन पर सांस ले रहे थे क्या उनके ऑक्सीजन लेवल कम करने से उनकी सांस नहीं घुटी होंगी। दमघोंटू मॉकड्रिल की जरूरत क्यों पड़ी। इन सवालों के जवाबों पर प्रशासन चुप्पी साध बैठा है।