जहां ताजनगरी की ज्यादातर मंडियां मुगल बादशाह अकबर के दौर में बनाई गई थीं, वहीं एक मंडी उनके पौत्र शाहजहां ने बनवाई थी। इसका नाम है शहजादी मंडी। यहां सिर्फ मुगल शहजादियां खरीदारी करती थीं। यह मंडी बनाई भी एक शहजादी की ख्वाहिश पर गई थी, जिसका नाम था जहांआरा। वह शाहजहां की चहेती बेटी थी। उसने शाहजहां से कहा था कि मीना बाजार के अलावा भी एक ऐसा बाजार होना चाहिए जो सिर्फ मुगल शहजादियों के लिए हो।
इतिहासकार राज किशोर राजे ने बताया कि शहजादी मंडी में शाही परिवार के पुरुषों को भी प्रवेश की अनुमति नहीं थी। न ही आम महिलाएं वहां जा सकती थीं। यह सिर्फ शहजादियों के लिए थी। यह मंडी कुछ मीना बाजार की तरह थी।
मीना बाजार शाही परिवार की महिलाओं के खरीदारी करने के लिए होते थे। वहां दुकानदार भी महिलाएं होती थीं जबकि शहजादी मंडी में दुकानदार पुरुष होते थे। शाहजहां के इंतकाल के बाद ही शहजादी मंडी की रौनक फीकी हो गई। इसके बाद तो मुगलकाल में ही यह सिर्फ नाम की शहजादी मंडी रह गई, अन्य लोग भी खरीदारी के लिए आने लगे।