श्री पारस अस्पताल: डीवीआर ले जाता पुलिसकर्मी (फाइल)
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आगरा के श्री पारस अस्पताल प्रकरण में वायरल हुए वीडियो बनाने के शक में पुलिस ने एक युवक का मोबाइल जब्त किया था। इस मोबाइल में वीडियो नहीं मिलने पर फोरेंसिक साइंस लैब भेजा गया। 14 दिन बाद भी पुलिस को रिपोर्ट का इंतजार है कि वीडियो रिकवर हुआ या नहीं? पुलिस ने अब तक युवक को क्लीन चिट नहीं दी है।
छत्ता क्षेत्र का रहने वाला युवक अस्पताल गया था। पुलिस ने युवक से पूछताछ की लेकिन उसने वीडियो की जानकारी से इंकार कर दिया था। उसका मोबाइल भी चेक किया था। मोबाइल में अस्पताल के मालिक का कोई वीडियो नहीं मिला था।
वीडियो डिलीट करने की आशंका पर मोबाइल लैब भेजा गया। मगर, मोबाइल की रिपोर्ट अब तक नहीं आ सकी है। थाना न्यू आगरा के प्रभारी निरीक्षक भूपेंद्र बालियान का कहना है कि फोरेंसिक रिपोर्ट नहीं आई है। रिपोर्ट के लिए पत्र लिखा जाएगा।
नहीं मिले इन सवालों के जवाब
- अस्पताल में ऑक्सीजन की मॉकड्रिल की बात वीडियो में स्वीकार की गई। मगर, प्रशासन की जांच में डाक्टर को क्लीन चिट दे दी गई। अगर, ऑक्सीजन की मॉकड्रिल नहीं हुई तो डॉक्टर क्यों बात कर रहे हैं?
- सोशल मीडिया पर जो वीडियो वायरल हुआ, उसमें एक व्यक्ति स्टूल पर बैठा नजर आया है। वहीं अस्पताल मालिक की आवाज सुनाई दे रही है। वीडियो बिल्कुल पास से ही बनाया गया है। वीडियो बनाने वाला व्यक्ति कौन है?
- वीडियो के ऑक्सीजन के मॉकड्रिल के कुछ दिन बाद ही बनने की आशंका है? यह बात खुद डॉक्टर भी पुलिस को सही से नहीं बता सके हैं कि यह कब बनाया गया? पुलिस क्यों नहीं पता कर पाई है?
- 26 अप्रैल को मॉकड्रिल की गई होगी तो अस्पताल में अफरातफरी का माहौल होना चाहिए? यह अस्पताल के सीसीटीवी कैमरों के फुटेज में सामने आ सकता है? मगर, अब तक पुलिस सीसीटीवी कैमरों के फुटेज क्यों नहीं देख सकी?
- जिला प्रशासन की ओर से ऑक्सीजन के सिलिंडर उपलब्ध कराए जा रहे थे। प्रशासन की ओर से कहा भी जा चुका है कि ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं थी। मरीजों के तीमारदार भी सिलिंडर लेकर आ रहे थे। ऐसे में ऑक्सीजन की मॉकड्रिल क्यों की गई?
उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग में केस पंजीकृत
छत्ता के रहने वाले अशोक चावला के पिता और भाई की पत्नी की श्री पारस अस्पताल में मौत हुई थी। वह कोरोना संक्रमित हो गए थे। आरोप है कि अस्पतालमें ऑक्सीजन बंद करने की वजह से दोनों की मौत हुई। अशोक चावला ने 24 जून को उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग को पत्र भेजा था। इसमें अपने दस्तावेज भी लगाए थे। अशोक चावला ने बताया कि अब उनकी शिकायत को पंजीकृत कर लिया गया है।