यहां एएसआई ने चारों ओर से लकड़ी की रेलिंग लगा दी है। इसके साथ ही इसी परिसर में अनूप तालाब, टर्की सुल्ताना महल और दीवान-ए-खास को भी चारों ओर से घेरा गया है। एएसआई ने इस पर 16 लाख रुपये खर्च किए हैं।
अधीक्षण पुरातत्वविद वसंत कुमार स्वर्णकार ने बताया कि मुसम्मन बुर्ज हो या अन्य स्मारक, कई पर्यटक ऐसे आते हैं जो खुरच कर उन्हें नुकसान पहुंचाते हैं। इस रेलिंग से वह दीवार से दूर रहेंगे। पर्यटकों को स्मारक देखने हैं। इससे उस पर कोई असर नही पड़ेगा। स्पर्श न करने से अन्य लोग संक्रमण से भी बच पाएंगे।
शीशे के पार से देख पाएंगे दीवान-ए-खास
फतेहपुर सीकरी में दीवान-ए-खास में स्थित पिलर के चारों ओर पत्थर के बेस पर लकड़ी की रेलिंग लगाई गई है। पर्यटक इसे बार बार छूते हैं। यहां एएसआई कांच लगाएगा, ताकि पर्यटक उसे देख तो सकें, पर छू न सकें।
पूर्व में पर्सी पोलिस मकबरे की तर्ज पर ताजमहल पर भी मुख्य मकबरे में ऐसा ही कांच लगाने की योजना थी, लेकिन गाइडों के विरोध के कारण रोकनी पड़ी।