इसी तरह कक्षा छह से आठ तक में पढ़ाई जाने वाली ‘मंजरी’, ‘गणित’, ‘आओ समझें विज्ञान’, ‘संस्कृत पीयूषम’, ‘रेनबो’ के नाम भी कक्षावार बदले गए हैं। मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक, बेसिक महेश चंद्र का कहना है कि परिषदीय स्कूलों के विद्यार्थियों के पाठ्यपुस्तकों का नाम बदलने का निर्णय शासन स्तर से लिया गया है। विद्यार्थियों के हित में ऐसा किया गया है।
विद्यार्थियों के मन में नवीनता का भाव आएगा
प्राथमिक शिक्षक संघ के आगरा जिलामंत्री बृजेश दीक्षित ने कहा कि कक्षावार पुस्तकों का नाम बदलना सरकार का अच्छा निर्णय है। प्रत्येक कक्षा में पुस्तकों का नाम बदलने से विद्यार्थियों के मन में नवीनता का भाव आएगा।
प्रस्तुतीकरण को और अच्छा बनाना चाहिए था
यूटा के जिला महामंत्री राजीव वर्मा ने कहा कि सरकार को किताबों का नाम बदलने के साथ पुस्तकों को पन्ने को और अच्छा और पाठ्य सामग्री के प्रस्तुतीकरण को और रोचक बनाना चाहिए था। इससे विद्यार्थियों की रुचि पढ़ने में बढ़ती।