आगरा डकैती कांड का आरोपी लाला
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सरगना लाला अभी भी फरार
गैंग में शामिल प्रभात शर्मा ने थाने आकर समर्पण किया था। चौथे बदमाश संतोष जाटव को पुलिस ने मुठभेड़ में घायल होने के बाद गिरफ्तार किया था। गैंग का सरगना फिरोजाबाद का हिस्ट्रीशीटर नरेंद्र उर्फ लाला है। वह फरार है। उस पर एक लाख रुपये का इनाम है। गैंग में शामिल अन्य बदमाशों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।
आईजी नवीन अरोरा ने बताया कि वारदात में शामिल फीरोजाबाद के सुहाग नगर निवासी अंशुल सोलंकी और रेकी करने वाला अंशू यादव उर्फ ध्रुव मंगलवार को पकड़े गए। अंशुल के जीजा संजय को भी गिरफ्तार किया गया है। संजय मूलरूप से मैनपुरी का रहने वाला है।
वह फिरोजाबाद में बगीची में रह रहा है। अंशू यादव गैंग के सरगना नरेंद्र का करीबी है। वह नोएडा से लेकर आगरा की गोल्ड लोन कंपनी की रेकी कर चुका है। घटना से पहले उसके पैर में फ्रैक्चर हो गया था। इसलिए वह वारदात में शामिल नहीं हुआ था। मगर, उसे भी नरेंद्र ने हिस्सा दिया था।
उन्होंने बताया कि अंशुल सोलंकी डकैती में शामिल रहा। वह अपने हिस्से का सोना लेकर जीजा संजय के साथ मैनपुरी चला गया था। संजय ने सोना छिपा दिया था। इसलिए संजय को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा जा रहा है। नरेंद्र और उसके साथी रेनू पंडित उर्फ अभिनाश शर्मा की गिरफ्तारी को टीमें लगाई गई हैं।
मददगार भी मुकदमे में होंगे शामिल
आईजी ने बताया कि बदमाशों का साथ देने वाले भी मुकदमे में नामजद किए जाएंगे। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार करके जेल भेजा जाएगा। अंशुल के जीजा पर कार्रवाई कर दी गई है। नरेंद्र का भाई अरुण भी घटना के समय आरोपियों के संपर्क में था। उसने घटना के बाद लूटा गई नकदी छिपा दी थी। संतोष जाटव और रेनू पंडित की पत्नी ने सोना छिपाया था। अब पुलिस मददगारों को भी आरोपी बनाएगी। उन्हें भी जेल भेजा जाएगा।
गोल्ड लोन कंपनी की 15 बार की थी रेकी
पुलिस की पूछताछ में अंशुल सोलंकी ने बताया कि गैंग ने कमला नगर स्थित गोल्ड लोन शाखा की 15 बार रेकी की थी। इससे पहले वो भगवान टॉकीज स्थित गोल्ड लोन शाखा की रेकी कर चुके थे। मगर इस शाखा की बिल्डिंग में रेस्टोरेंट था। यहां लोगों का आना-जाना लगा हुआ था। इस कारण यहां पर लूट की योजना रद्द कर दी। नोएडा की शाखा में रेकी करके आए थे। वहां सुरक्षा थी। भागने वाले रास्ते पर भीड़भाड़ होने की वजह से इरादा बदल दिया।
कमला नगर में घटना वाले दिन अंगूठी गिरवी रखकर लोन लेने के बहाने घुसे थे। संतोष और मनीष सोने की अंगूठी को गिरवी रखने की बात कर रहे थे। उनके साथ एक-एक साथी और था। तीसरे गुट में दो और बदमाश अंदर पहुंचे थे। बाहर से दरवाजा बंद कर दिया था।
लूट के बाद सभी बदमाश पैदल ही भागे थे। दो गुट में बंट गए थे। एक गुट में मनीष, प्रभात और निर्दोष कुमार थे जबकि दूसरे में नरेंद्र के साथ तीन लोग टूंडला पहुंचे थे। मनीष और निर्दोष कुमार मुठभेड़ में ढेर हो गए थे। नरेंद्र के घर पर पहुंचकर बाकी लोगों ने बंटवारा किया था।