किला के सामने रामलीला मैदान हो या सर्किट हाउस का गोल्फ कोर्स। आगरा क्लब का मैदान या कोठी मीना बाजार। जीआईसी हो या फिर तारघर। शहर के ये वो मैदान हैं जहां जन नेताओं की जनसभाएं इतिहास में दर्ज हो गई। ऐसे सियासी तूफान उठे जिनसे शहर की सूरत बदल गई। दलों का जनाधार ही नहीं बढ़ा, विकास का खाका भी खिंचा। परंतु अब ताजनगरी के जनसभा स्थल वीरान पड़े हुए हैं।
सर्किट हाउस : यह कभी शहर का सबसे बड़ा मैदान था। अब यहां एक तरफ गोल्फ कोर्स है दूसरी तरफ पीएसी मैदान। कभी यहां इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, वीपी सिंह प्रधानमंत्री के रूप में सभाएं कीं। उन दिनों कांग्रेस की आंधी थीं। सर्किट हाउस में आखिरी बार सभा मुलायम सिंह यादव ने की थी। सुरक्षा कारणों से अब यहां जनसभाएं नहीं होतीं।
आगरा क्लब : जहां आज एकलव्य स्टेडियम बना है वहां आगरा क्लब का मैदान था। 1962 में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने एतिहासिक जनसभा की। ये वो दौर था जब देश में नेहरू के प्रति लोगों में पागलपन की हद तक दीवीनगी थी। जब वह आगरा आए थे सड़कों पर ऐसी भीड़ उमड़ी कि उनकी कार फंस गई। मैदान तक घोड़े पर बैठ कर पहुंचे।
रामलीला मैदान : आगरा किला के सामने एतिहासिक रामलीला मैदान में 1953 में कांग्रेस का राष्ट्रीय सम्मेलन हुआ था। 1977 में इंदिरा गांधी ने चुनाव सभा की। उन्हीं दिनों जीआईसी मैदान में संजय गांधी व प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने सभा की। इस सभा में किए वादों के मुताबिक एमजी रोड चौड़ी करने, विकास प्राधिकरण का गठन, चमड़ा उद्योग केंद्र बने।