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खातों में 15 लाख नहीं आया सिर्फ एक रुपया

Sat, 02 Apr 2016 01:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
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खातों में 15 लाख नहीं आया सिर्फ एक रुपया - फोटो : डेमो पिक
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बैंक खाते में एक साल से बैलेंस था ‘जीरो’, लेकिन फरवरी-मार्च के बीच में एकाउंट का बैलेंस हो गया एक रुपया। ऐसा एक दो नहीं, बल्कि 35 हजार से ज्यादा खातों में हुआ तो खाताधारक चौंक गए। खाता खुलवाते वक्त चर्चाएं सुनते रहे कि काले धन की वापसी पर हर एकाउंट में 15 लाख रुपये मिलेंगे, लेकिन यह एक रुपया कहां से आया। बैंक जाकर पूछा तो माजरा समझ आया। दरअसल, जीरो बैलेंस एकाउंट से साख खराब होने और एकाउंट जारी रखने बाध्यता में बैंक मैनेजरों ने ही यह रास्ता चुना। इससे तकनीकी रूप से बैंक एकाउंट चालू भी हो गए और जीरो बैलेंस एकाउंट की संख्या घट गई। 
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प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत जिले भर में बैंक खातों को खुलवाया गया। जिले में साढ़े तीन लाख से ज्यादा बैंक खाते जीरो बैलेंस पर खुले। जो खाते गैस सब्सिडी, वेतन और मनरेगा से जुड़ गए, उनमें तो लेन-देन शुरू हो गया, लेकिन करीब 45 फीसदी खाते यानी करीब 1.60 लाख खातों का बैलेंस जीरो ही रहा। हर छमाही लेन-देन की बाध्यता के बाद भी खातों का बैलेंस जीरो रहा। बैंकों ने अपनी साख और खातों को तकनीकी रूप से चालू रखने के लिए नया रास्ता निकाला। प्राइवेट बैंकों ने तो खाताधारकों से एकाउंट में रुपये जमा करा लिए, लेकिन सार्वजनिक क्षेत्र की एक दर्जन बैंकों ने एक रुपया जमा कराया।

बोरों में भरे रखे हैं ‘रुपये कार्ड’
प्रधानमंत्री जन-धन योजना में बैंक खाता खुलवाने वालों को लेन-देन के लिए मास्टर और वीजा कार्ड की तर्ज पर रुपये कार्ड जारी किया गया था। बैंकों ने लक्ष्य पूरा करने के लिए खाते भी खूब खोले, लेकिन हाल ये है कि 30 फीसदी से ज्यादा जन-धन खाते जीरो बैलेंस पर चल रहे हैं। खाताधारक अपने एकाउंट का रुपये कार्ड लेने तक नहीं आए। डेढ़ साल से ऐसे रुपये कार्ड बैंकों में बोरों में भरकर पड़े हुए हैं। 
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मैनपुरी में 50 हजार खातों में पहुंचा एक-एक रुपया
जिले में जन-धन योजना के तहत कुल 4,90,450 खाते खोले गए थे। इनमें से लगभग 50 हजार खाते शून्य पर चल रहे थे। इन खातों में खुलवाने के बाद से कोई लेनदेन नहीं हुआ। लीड बैंक मैनेजर वीरेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि कंप्यूटर पर बैलेंस शून्य न दिखे, इसके लिए कई बैंकों ने खातेदारों से एक रुपया जमा कराया है।
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