खुद में ‘मस्त’ नहीं बीमार है आपका लाल
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खुश है या परेशानी, फिर भी चेहरे पर भाव एक समान। डांट या दुलार रहे हो, कोई प्रतिक्रिया नहीं। बोलने में परेशानी है या एक ही शब्द की रट पकड़ लेना। रोजाना का यही हाल तो यह मत समझ लिजिए की आपका ‘लाल’ खुद में मस्त है, बल्कि वह बीमार है। ये आटिज्म बीमारी के लक्षण हैं। फिलहाल इसकी चपेट में करीब एक फीसदी तक बच्चे हैं। लेकिन आटिज्म डिसआर्डर की ये बीमारी अब तेजी से बढ़ रही है। एसएन मेडिकल कालेज के मानसिक रोग विभागाध्यक्ष डा. विशाल सिन्हा बताते हैं कि इसके पीड़ित बच्चे प्रतिक्रिया नहीं करते। अमूमन इसकी पहचान अभिभावक देर से कर पाते हैं। इसका कारण जन्मजात, अधिक उम्र मे पिता बनने पर उसकी संतान में या फिर न्यूरोट्रांसमीटर के असंतुलन से होती है।
क्या है आटिज्म:
मस्तिष्क के विकास के दौरान होने वाली बीमारी है, जो दिमाग के कई भागों को प्रभावित करती है। इससे शारीरिक और मानसिक विकास पिछड़ता है। व्यवहार सामान्य बच्चों जैसा नहीं रहता।
काउंसलिंग से पहुंचता फायदा
इस बीमारी में काउंसलिंग और स्पीच थेरेपी सबसे कारगर इलाज है। ऐसे लक्षण वाले बच्चों को विशेषज्ञ काउंसलिंग करते हैं। स्पीच थेरेपी के जरिए इन्हें बोलने का अभ्यास कराते हैं।
ये हैं लक्षण:
अपना नाम पुकारे जाने पर प्रतिक्रिया न देना
मुस्कराना नहीं, अकेले रहना पसंद करना
बातचीत में असमर्थ, एक शब्द की रट लगाना
किसी की ओर न देखना, अनसुना करना
सामाजिक गतिविधियों के प्रति उदासीनता