आगरा। रजिस्ट्री कार्यालयों में फर्जीवाड़े को रोकने के लिए लागू की गई आधार प्रमाणीकरण व्यवस्था से बच्चों के नाम रजिस्ट्री पर ब्रेक लग गया है। तकनीकी खामियों के कारण रजिस्ट्री नहीं हो पा रही हैं। सबसे ज्यादा संकट नाबालिग बच्चों के नाम होने वाली रजिस्ट्री और रक्त संबंधों में पावर ऑफ अटॉर्नी को लेकर खड़ा हो गया है।
वर्तमान रजिस्ट्री पोर्टल में तकनीकी बाधा यह है कि यदि कोई अभिभावक अपने नाबालिग बच्चे के नाम संपत्ति खरीदना चाहता है, तो वहां बच्चे का आधार कार्ड अनिवार्य है। समस्या तब आती है जब प्रमाणीकरण के लिए संरक्षक का अंगूठा मांगा जाता है। नियमों के अनुसार, बच्चे के संरक्षक का अंगूठा लगना चाहिए, लेकिन सॉफ्टवेयर केवल आधार कार्डधारक (बच्चे) के बायोमेट्रिक्स की मांग कर रहा है। तालमेल न बैठने के कारण बच्चों के नाम होने वाली संपत्तियों की रजिस्ट्री पूरी तरह ठप हो गई है।
इसके अलावा पावर ऑफ अटॉर्नी (मुख्तारनामा) के मामलों में भी सॉफ्टवेयर परेशानी खड़ी कर रहा है। पोर्टल पर पावर ऑफ अटॉर्नी देने वाले व्यक्ति का आधार तो सत्यापित हो रहा है, लेकिन उसके प्रतिनिधि का सत्यापन पोर्टल स्वीकार नहीं कर पा रहा है। इसके अलावा, कई गवाहों के आधार डाटा में विसंगति या सर्वर डाउन होने के कारण भी दस्तावेज रजिस्टर्ड नहीं हो पा रहे हैं।
सदर तहसील स्थित पांचों सब-रजिस्ट्रार दफ्तरों में अमूमन प्रतिदिन 300 से अधिक दस्तावेजों की रजिस्ट्री होती है लेकिन आधार व्यवस्था अनिवार्य होने के बाद यह आंकड़ा 40 से 50 प्रतिशत तक गिर गया है। मंगलवार को स्थिति यह रही कि लोग सुबह से शाम तक कागजी औपचारिकताओं और पोर्टल की समस्या से जूझते रहे और अंत में बिना काम कराए ही वापस चले गए।
सहायक महानिरीक्षक निबंधन योगेश कुमार ने बताया कि शुरुआती स्तर पर कुछ व्यावहारिक और तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों के नाम संपत्ति हस्तांतरण और पावर ऑफ अटॉर्नी से जुड़ी समस्याओं का फीडबैक शासन को भेज दिया गया है। पोर्टल में कुछ आवश्यक बदलाव होने हैं, जिसमें थोड़ा समय लग सकता है। जल्द ही नई व्यवस्था सुचारु हो जाएगी।
अब आंखों की पुतलियों से होगी पहचान
फर्जीवाड़े पर लगाम कसने के लिए विभाग नियम और कड़े करेगा। आधार के बाद अब आइरिस स्कैन यानी आंखों की पुतलियों के जरिये सत्यापन की तैयारी है। स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग ने इसका प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। भविष्य में बायोमेट्रिक के साथ-साथ आंखों की स्कैनिंग भी अनिवार्य होगी जिससे रजिस्ट्री में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी की गुंजाइश न रहे।