फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तीन साल पहले थे निर्मल, अब हुए बदहाल

विज्ञापन
विज्ञापन
आगरा। नाम जरूर निर्मल है, लेकिन सफाई से अब कोई नाता नहीं। तीन साल पहले 2011 में निर्मल गांव का पुरस्कार भी राष्ट्रपति के हाथों मिला, लेकिन उस सम्मान को सहेज तक नहीं सका जैतपुर का गांव फतेहपुरा। कसूर ग्राम सभा का है तो सरकार का भी कम नहीं। तीन साल पहले चुने गए निर्मल गांव को पुरस्कार बतौर एक लाख रुपये का पुरस्कार अब तक नहीं मिला। पंचायत राज विभाग को आधी अधूरी पुरस्कार राशि अब मिली है, जो दो महीने बाद ही ग्राम प्रधान को मिलेगी। फतेहपुरा की तरह 2012 और 2013 में चुने गए निर्मल गांव अब बदहाल होते जा रहे हैं।
विज्ञापन

जैतपुर ब्लॉक के गांव फतेहपुरा को तीन साल पहले 2011 में निर्मल गांव के रूप में चुन कर पुरस्कृत किया गया। तब पूरे जिले में एकमात्र फतेहपुरा को ही निर्मल गांव के मानकों पर खरा पाया गया। इन तीन सालों में फतेहपुरा निर्मल गांव के रूप में पुरस्कार राशि पा नहीं सका, उससे पहले ही बदहाली के कगार पर पहुंच गया। प्राथमिक स्कूल के सामने गंदगी के ढेर हैं तो पंचायत भवन तक पहुंचने का रास्ता ही नहीं है। पंचायत भवन के गेट पर लगा हैंडपंप अब पानी नहीं देता। री-बोर की कतार में है। 2011 में चयनित फतेहपुरा को पुरस्कार राशि अगस्त 2014 में जारी हो पाई है। निर्मल गांव के तहत एक लाख रुपये का पुरस्कार मिलता है, लेकिन इसमें भी अभी 82 हजार रुपये की पहली किश्त जारी की गई है। दूसरी किश्त के लिए गांव के प्रधान को अभी भी इंतजार है।

ग्राम सभा को पुरस्कार का इंतजार
निर्मल गांव पुरस्कार को लेकर सरकार संजीदा ही नहीं है। केवल फतेहपुरा ही नहीं, बल्कि उसके बाद 2012, 2013 में चुने गए 30 निर्मल गांव को पुरस्कार राशि अब तक मिली ही नहीं है। गांव के चुनने की खुशी तब तक फीकी पड़ जाती है, जब काफी देरी के बाद पुरस्कार राशि प्रधान को मिलती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें