आगरा। दयालबाग शिक्षण संस्थान की बायो टेक्नोलॉजी के नैनो लैब में शोध छात्रा नेहा शर्मा की जघन्य तरीके से हत्या कर दी गई थी। लैब पर पुलिस ने अपना ताला तो लगाया लेकिन उसे सील नहीं किया। पांच माह में घटनास्थल का नक्शा ही बदल गया। यहां गड्ढे खुदवा दिए गए हैं। लैब का रास्ता ही बंद कर दिया गया है।
हत्याकांड के बाद एक माह तक पुलिस ने कालेज परिसर में ही कार्यालय खोलकर जांच की थी। इसके बाद पुलिस ने लैब में साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए अपना ताला लगा दिया था। हत्याकांड में संस्था से जुड़े पदाधिकारी के धेवते उदय स्वरूप और लैब टेक्निशियन यशवीर संधू को जेल भेजे जाने के बाद भी लैब का ताला नहीं खोला गया। छात्रा के पिता ने सीबीआई जांच के लिए प्रार्थना पत्र दे दिया था। इसके बाद पुलिस को लग रहा था कि अब मामले की जांच सीबीआई करेगी। सीबीआई को जांच के लिए साक्ष्य एकत्रित करने होंगे। लैब की चाबी पुलिस के पास थी लेकिन डीईआई प्रशासन ने लैब के बाहर का नक्शा बदल डाला है। लैब के सामने एक दर्जन से अधिक गहरे गड्ढे खोद दिए गए हैं। लैब तक जाने का रास्ता भी नहीं छोड़ा गया है। लैब के सामने स्थित जिस पानी के टैंक में हत्यारोपियों के खून से सने हाथ धोए जाने की बात प्रकाश में आई थी वह भी अब हटा दिया गया है। माना जा रहा है कि सुबूतों से छेड़छाड़ की गई है। जब कॉलेज प्रशासन से इस संबंध में पूछा गया तो जवाब मिला कि लैब तक दूसरी इमारत बनाई जा रही है।
ताले पर सील क्यों नहीं लगाई?
पुलिस ने हत्याकांड में सुबूत एकत्र करने में शुरू से लापरवाही बरती। लैब से साक्ष्य एकत्रित करने को पुलिस ने निठारी कांड के फोरेंसिक एक्सपर्ट्स की टीम को 31 मार्च को बुलाया था। टीम ने यहां तीन दिन तक साक्ष्य एकत्रित किए थे। लैब तभी से पुलिस के कब्जे में थी। पुलिस ने लैब में अपना ताला तो लगवा दिया, लेकिन इसे सील नहीं किया। क्या सुबूतों से छेड़खानी के लिए लैब के सामान्य ताले को दूसरी चाबी से नहीं खोला जा सकता है? पुलिस का कहना है कि लैब में उसका ताला लगा है, जिसकी चाबी थाने में रहती है।