एटा। मुफलिसी में जी रहे परिवारों को अपने बेटे और बेटियों को शिक्षा दिलाने का एक मात्र जरिया सरकारी स्कूलों में पढ़ाना भी मुश्किल हो गया है। नए पाठ्यक्रम का बोझ इस बार तीन से चार गुना तक बढ़ गया है। माध्यमिक शिक्षा के स्कूलों में चलने वाली सरकारी किताबों का स्थान निजी पब्लिशर्स की किताबों ने ले लिया है। ऐसे में किताबों का बाजार खुल गया है। सरकारी स्कूलों में निजी प्रकाशकों की पुस्तकें चलेंगी, जिनकी दाम तीन से चार गुना तक बढ़े हुए हैं।
निजी प्रकाशकों ने नए पाठ्यक्रम में कुछ पाठ बढ़ाकर और पेज की क्वालिटी बेहतर कर कीमतों में तीन से चार गुना इजाफा कर दिया है। बदली किताबों और निजी प्रकाशकों की पुस्तकों और सरकारी किताबें कम होने से राजकीय विद्यालयों के प्रधानाचार्य भी आश्चर्यचकित हैं। बारहवीं प्रथम वर्ष की जो किताब अब तक 30 रुपये में आती थी वो 120 रुपये की है। वहीं अंग्रेजी की किताब 72 रुपये की हो गई है, जो पहले महज 25 रुपये में मिलती थी। कमोवेश कीमतों के यही हालात बारहवीं प्रथम और द्वितीय वर्ष की किताबों में भी है। दसवीं में हिंदी की किताब अभी तक 35 रुपये की थी, लेकिन अब कीमत तीन गुना से अधिक 120 है।
निजी प्रकाशकों और सरकारी की पुस्तकों की कीमतों में अंतर
इंटरमीडिएट प्रथम और द्धितीय वर्ष
विषय पहले की दर नई दरें
हिंदी 30 168.00
अंग्रेजी 30 140.00
हाईस्कूल
हिंदी 35 120.00
गणित 45 200.80
अंग्रेजी 30 145.80
सामाजिक विज्ञान 35 200.80
स्मृति चित्रण 30 055.30
सामाजिक विज्ञान की बुक में जीएसटी का पाठ
दसवीं की सामाजिक विज्ञान की किताब में इस बार जीएसटी का पाठ भी शामिल किया गया है। अब छात्रों को जीएसटी के लाभ, हानि, पृष्ठभूमि, 122वां संविधान संशोधन, कौन से करों का समायोजन और जीएसटी के देश के आर्थिक विकास आदि के बारे में भी पढ़ाया जाएगा।
निदेशालय ने निजी पब्लिशर्स की सूची जारी की है। उन्हीं की किताबें चल रहीं हैं। कीमते कितनी बढ़ीं हैँ पता नहीं है। फिर भी विभाग से पता लगाया जाएगा।
एसपी यादव
डीआईओएस एटा