घरौनी के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र की बेनामी संपत्ति का रिकार्ड खंगालने के साथ ही अब केंद्र सरकार ने खसरा और खतौनी को आधार कार्ड से लिंक कराने के आदेश जारी किए हैं। दोनाें प्रमाण पत्र आधार से लिंक होने पर गांवों में जमीन खरीद कर काली कमाई खपाने वाले धन कुबेरों पर आसानी ने शिकंजा सका जा सकेगा।
केंद्र सरकार के खतरा और खतौनी को आधार कार्ड से लिंक कराने के फैसले को प्रशासनिक अधिकारी और जानकार लोग भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम से जोड़ कर देख रहे हैं। सरकार ने घरौनी के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र की बेनामी संपत्ति जुटाने के आदेश पहले ही दिए हैं। भारत सरकार के कैबिनेट सचिव के अनुसचिव ने इस संबंध में सभी प्रदेशों के प्रमुख सचिवों को भू संपत्तियों का आधार कार्ड से लिंक कराने के लिए अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। अभियान से बेनामी संपत्तियों का पता चल सकेगा। एडीएम सतीश पाल का कहना है कि केंद्र के आदेश का हर हाल में अभियान चला कर पालन कराया जाएगा।
संपत्तियों के डिजिटजलाइशेन का काम जारी
जिला प्रशासन के अफसरों का कहना है कि खसरा-खतौनी को आधार कार्ड से लिंक कराने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। प्रदेश सरकार पहले से ही सभी खेतों के गाटों का यूनीक नंबर देने का काम कर रही है। इन दिनों खतौनी के हर काश्तकार का अंश अंकित करने का अभियान नेशनल लैंड रिकार्ड डिजिटलाइजेशन प्रोग्राम के तहत चल रहा है।