भूमि अधिग्रहण की आग अभी शांत भी नहीं हुई थी कि यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने तहसील पर अधिसूचित ग्राम पंचायतों की सूची चस्पा करके किसानों की दुखती रग पर हाथ रख दिया है। प्राधिकरण ने क्षेत्र में नोटिस बोर्ड भी लगाए हैं। इसके तहत इन ग्राम पंचायतों की भूमि को न बेचा जा सकेगा और न ही इन पर कोई निर्माण होगा। किसान प्राधिकरण के खिलाफ आंदोलन की रणनीति बनाने में जुटे हैं।
यमुना एक्सप्रेसवे, टाउनशिप, इनररिंग रोड और थीम पार्क के लिए जमीन अधिग्रहण करने में शासन-प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी, फिर भी प्रस्तावित भूमि का शतप्रतिशत अधिग्रहण नहीं हो सका। तहसील में मंगलवार को प्राधिकरण ने एक सूची चस्पा की। इसके तहत एत्मादपुर तहसील की ग्राम पंचायत रायपुर, रहनकलां, कुबेरपुर, छलेसर, चौगान, धौरऊ, नादऊ, पोइया, नवलपुर, उजरई, खेड़िया खंदौली, रामनगर खंदौली, मलूपुरा, हाजीपुर खेड़ा, पर्वतपुर, सौरई, गुढ़ा, अगरपुर, अगवार खास, अरेला, आंवलखेड़ा, ऊंचा, खगरपुर, खैरानी, गढ़ी पृथ्वी, गढ़ी बच्ची, गिजौली मुस्तकिल, गिजौला गैराबाद, चावली, चिरहौली, छोकदा, बुढिया का ताल, धरैरा, नगला निशंक, परिहार, पैंतखेड़ा, पैसई, वमान, बांधनू, सैमरा, शेरखां, हसनपुर, गदपुरा, नगला मनी, गिरौनी मुस्तकिल, गिरौली आठमैहली के अलावा तहसील सदर के बमरौली कटारा, इकतारा, हिंगोट खेड़िया, एत्मादपुर मदरा, गुधाना, महुआ खेड़ा, समोगर, शर्बतपुर, बीजामई, बुढ़ाना आटमैहली, समोगर आटमैहली, सरगना खेड़ा आदि गांवों में जमीन नहीं बेची जा सकेगी और न ही इन पर निर्माण होगा।
इनसेट
यह लिखा है नोटिस बोर्ड पर
यह क्षेत्र यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण/भू-अधिसूचित क्षेत्र के अंतर्गत आता है। उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास क्षेत्र विकास अधिनियम 1976 के प्रावधानों के तहत, यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण को ही क्षेत्र में नियोजन विकास कार्य एवं भूमि आवंटन का अधिकार प्राप्त है। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के अतिरिक्त किसी अन्य व्यक्ति, फर्म, संस्था, सोसायटी को इस क्षेत्र में निर्माण अथवा विकास कार्य करने का अधिकार नहीं है। कोई भी निर्माण विकास कार्य एवं भूमि उपयोग परिवर्तन करना अधिनियम 1976 के प्रावधानों के विपरीत है तथा अपराध की श्रेणी में आता है।