50 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का आरोपी आशीष वशिष्ठ नाम बदलकर आरव वशिष्ठ बन गया और नया आधार कार्ड बनवाकर करीब दो साल तक पुलिस से बचता रहा। गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसके बैंक खातों, संपत्तियों और गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की जांच कर रही है।
आगरा में 50 करोड़ ठगी का आरोपी सदर के कल्याण सिटी निवासी आशीष वशिष्ठ ने पुलिस और बैंक से बचने के लिए अपना नाम बदल लिया था। आरोपी ने राजपत्र में अपना नाम आरव वशिष्ठ करा लिया था। इसके माध्यम से आधार कार्ड भी बनवा लिया। पुलिस ने उसकी कुंडली खंगाली है। उस पर चार प्राथमिकी पहले से दर्ज हैं। अब पुलिस उसके बैंक खातों की डिटेल भी निकलवा रही है। गिरोह से जुड़े पांच और सदस्यों के नाम सामने आए हैं।
डीसीपी साइबर क्राइम आदित्य सिंह ने बताया कि आशीष वशिष्ठ और उसके साथी उधम सिंह नगर निवासी रजत को साइबर ठगी के मामले में बुधवार को गिरफ्तार किया था। आरोपी दिल्ली और गाजियाबाद समेत कई राज्यों के साइबर अपराधियों के संपर्क में थे। आरोपियों ने फर्जी तरीके से जन सेवा केंद्र खोला था। वो ई-वालेट में ठगी की रकम मंगवाते थे। इस रकम से लोगों के बिजली और मोबाइल बिल भरते थे। इसके साथ ही ट्रेन और हवाई टिकट भी खरीदते थे।
खाते से मिली अहम जानकारी
आरोपियों के खातों की जानकारी मिली है। इनमें जमा रकम की जानकारी की जा रही है। आशीष वशिष्ठ पर सदर, मलपुरा के अलावा जौनपुर और गुरुग्राम में प्राथमिकी दर्ज हुई थीं। आशीष ने दो साल पहले राजपत्र में नाम बदलने के लिए आवेदन किया था। अपना नाम आशीष से आरव वशिष्ठ कर लिया। इस कारण ही पुलिस से बचता रहा।