अमर उजाला के पास मौजूद 18 मई 2022 तक की रिपोर्ट के अनुसार जिले की छह तहसीलों में 3422 तालाबों का ब्योरा राजस्व विभाग के पोर्टल दर्ज हुआ है। इनमें भी सिर्फ 2825 तालाबों के फोटोग्राफ ही तहसीलों के अधिकारी उपलब्ध करा सके हैं। ऐसे में अफसरों पर तालाबों के आंकड़ों को लेकर हेराफेरी के आरोप लग रहे हैं।
62 तालाबों पर और हो गया अतिक्रमण
तालाबों पर हुए अवैध कब्जे व अतिक्रमण हटाने के लिए 17 महीने में कोई कार्य योजना नहीं बनी। तालाबों की खोदाई नहीं हुई। 31 दिसंबर 2020 की रिपोर्ट में जिले में 139 तालाबों पर अतिक्रमण था। राजस्व विभाग के आंकड़ों के अनुसार 18 मई 2022 तक 201 तालाबों पर अतिक्रमण हो गया है। यानी इन 17 महीनों में 62 और तालाबों पर कब्जे हो गए हैं।
बाह में 222 तालाब हुए गायब
तालाबों के आंकड़ों में सबसे ज्यादा गड़बड़ियां बाह में हुई हैं। बाह में दिसंबर 2020 में 754 तालाब दर्शाए गए थे, अब 532 तालाब फीड हुए हैं। 222 तालाब गायब हो गए। इसी तरह खेरागढ़ में 62, एत्मादपुर में 63, फतेहाबाद में 27 और सदर तहसील में 2 तालाब रिकॉर्ड से गायब हैं।
16 साल से मूंद रखी हैं आंखें
सुप्रीम कोर्ट के याचिकाकर्ता डॉ. शरद गुप्ता ने कहा कि डीके जोशी ने 2006 में तत्कालीन कमिश्नर अशोक कुमार को पक्षकार बनाते हुए हाईकोर्ट में रिट दायर की। तब तत्कालीन डीएम संजय प्रसाद ने पुलिस, नगर निगम, एडीए की टीम बनाई थी। कुछ जगह अतिक्रमण हटाए थे। तब से 16 साल हो गए। तालाबों को लेकर अफसरों ने आंखें मूंद रखी हैं।
नहीं बनाई कोई कार्य योजना
जन प्रहरी के संयोजक नरोत्तम शर्मा ने कहा कि तालाबों को लेकर अफसर बैठकों के नाम पर रस्म अदायी करते हैं। लेखपाल व तहसीलकर्मियों की मिलीभगत से कब्जे हुए हैं। उन्हें ही हटाने हैं। प्रशासन लापरवाह है। तालाबों को पुनर्जीवित करने के लिए कोई कार्य योजना हीं नहीं बनाई गई। शासन को भी झूठी रिपोर्टें भेज कर गुमराह कर रहे हैं।
मांगा जा रहा प्रमाणपत्र
एडीएम प्रशासन व प्रभारी अधिकारी के अजय कुमार सिंह ने कहा कि सभी एसडीएम व तहसीलदारों को डाटा फीड कराना था। रिकॉर्ड में कहां गड़बड़ी हैं उसकी जांच करा ली जाएगी। त्रुटि रहित सूचना के संबंध में अधिकारियों से प्रमाणपत्र लिया जाएगा। तालाबों से अवैध कब्जे हटाने के निर्देश दिए गए हैं।