दावा : 332 किमी में 217 किमी नाले की सफाई
नगर निगम में मंगलवार को पेश की गई रिपोर्ट में नालों की सफाई का काम 60 फीसदी तक पूरा बताया गया है। 15 जून तक नालों की सफाई पूरी करनी है। शहर के अंदर 332 किमी लंबे नालों में से 217 किमी की सफाई का दावा सेनेटरी इंस्पेक्टरों ने किया है। पार्षद रवि बिहारी माथुर का आरोप है कि हकीकत इनके उलट है। अभी 10 फीसदी नाले साफ नहीं हो पाए हैं।
आरोप : तलीझाड़ सफाई नहीं की
पार्षद शिरोमणि सिंह ने बताया कि मंटोला, महावीर, शाही कैनाल, काजीपाड़ा जैसे बड़े नालों से मशीन से कुछ जगह सिल्ट निकाली है। कहीं से भी नालों से पॉलीथीन और कतरनें निकाल रहे हैं। तलीझाड़ सफाई नहीं की जा रही है। इससे मानसून में पहले जैसी स्थिति ही रहने वाली है। बीते साल भी ऐसे ही दावे किये गए थे, पर पूरे शहर में जलभराव हुआ। परंपरागत जगहों में जलभराव न हो, इसकी कोई योजना नहीं बनाई है।
दलील : निर्माण के लिए रिपोर्ट सौंपी
अपर नगर आयुक्त एसपी यादव ने कहा कि नालों की सफाई के दौरान हमने जहां जहां नाले टूटे पाए हैं, उनकी रिपोर्ट बनाकर चीफ इंजीनियर को सौंप दी है। नालों की मरम्मत का काम भी साथ हो जाएगा तो मानसून में दिक्कत नहीं आएगी। निर्माण के बारे में चीफ इंजीनियर तय करेंगे।
मानसून के बाद हो पाएगा काम
मेयर नवीन जैन ने कहा कि हमारे 400 कार्य ऐसे हैं, जिनमें टेंडर निकाले हैं लेकिन ठेकेदार टेंडर नहीं डाल रहे। नालों की मरम्मत के लिए प्रोजेक्ट बनाने के लिए कहा है। शासन से ड्रेनेज सिस्टम के लिए धन देने के लिए मांग करेंगे। निगम के पास बजट नहीं है। इसी वजह से 268 काम ऐसे हैं, जिनके वर्क ऑर्डर जारी हो चुके हैं, पर ठेकेदारों ने काम शुरू नहीं किया है। जो नाले टूटे हैं, उनमें मानसून के बाद ही काम हो पाएगा। अब तो टेंडर निकालने में ही मानसून आ जाएगा।