कासगंज। जिले में 25 जानों को निगलने वाला बुखार कहीं डेंगू डी2 वेरियंट तो नहीं है। जिले में जांच के पर्याप्त इंतजाम न होने से मौतें का कारण रहस्य बना हुआ है। कोरोना की तर्ज पर डेंगू के वैरियंट सामने आने से लोगों में खौफ है। जिले में डेंगू की दस्तक हो चुकी है। आईसीएमआर के डीजी, बलराम भार्गव फिरोजाबाद, आगरा, मथुरा और अलीगढ़ में बुखार के मामलों और मौतों में बढ़ोत्तरी डेंगू के वैरिंयट डी2 को मौत का कारण मान चुके हैं। जिले में अभी तक 25 मौतें बुखार से हो चुकी है, लेकिन डेंगू की जांच की बात की जाए तो यहां पर्याप्त इंतजाम नहीं है।
इस कारण सही पुष्टि नहीं हो पा रही है। जिला में डेंगू के लिए अभी तक किट के सहारे एनएस 1 की जांच ही होती रही है। इससे केवल व्यक्ति के शरीर में डेंगू वायरस की ही पुष्टि होती है। डेंगू फीवर के लिए डेंगू की आईजीजी एवं आईजीएम जांच की जाती है। इस जांच की किट एक दिन पहले ही विभाग को मिली है। इसके बाद एलाइजा जांच की जाती है। यह जांच प्रयोगशाला के माध्यम से की जाती है, लेकिन इस जांच के इंतजाम अभी तक जिले में नहीं है। इस जांच के लिए विभाग को अलीगढ़ में सैंपल भेजना होता है।
डेंगू के होते हैं चार वैरियंट
डेंगू एक वायरस है। जिसे डीईएवनवी नाम दिया गया है जो बीमारी का कारण बनता है। वास्तव में इसके चार रूप हैं। डीईएनवी-1, डीईएनवी-2, डीईएनवी-3, डीईएनवी-4। इसका मतलब है कि डेंगू संभावित रूप से किसी व्यक्ति पर चार बार हमला कर सकता है। यदि आप डेंगू के एक स्ट्रेन की चपेट में आए हैं और ठीक हो गए हैं तो भविष्य बाकी तीन स्ट्रेन भी आप पर हमला कर सकते हैं।
क्या है इसके लक्षण
डॉक्टरों के मुताबिक डेंगू के डी2 वैरिएंट के शुरुआती लक्षणों में मरीज को तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, जी मिचलाना, उल्टी, ग्रंथियों के जोड़ों में सूजन, हड्डी या मांसपेशियों में दर्द, दाने, शरीर में प्लेटलेट्स में गिरावट आना, रक्तस्रावी बुखार, अंग विफलता और डेंगू शॉक सिंड्रोम शामिल है।