मथुरा। पांच महानगरों की बिजली वितरण व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया के विरोध में उठे बिजली कर्मियों के आंदोलन ने सुगम योजना और अन्य कल्याणकारी योजनाओं की हवा निकाल दी। सबसे ज्यादा असर बिजली बिल की वसूली पर पड़ा है। आंदोलनरत बिजली अफसरों की उदासीनता के चलते वसूली आधी रह गई है।
प्रदेश सरकार ने मुरादाबाद, गोरखपुर, मेरठ, वाराणसी और लखनऊ की बिजली वितरण व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया चल रही है। इसके चलते एक सप्ताह से बिजली कर्मी रोजाना दो घंटे कार्य बहिष्कार कर रहे हैं। आंदोलन के चलते न तो बिजली की चेकिंग हो रही, और न सरकारी बकाए की वसूली हो रही। मार्च माह में बिजली वसूली के 117 करोड़ वसूले जाने थे। इसमें 15 मार्च तक 50 करोड़ से अधिक वसूल लिए गए लेकिन एक सप्ताह से शुरू हुए आंदोलन के बाद से वसूली एकदम धड़ाम हो गई। अब केवल 10 करोड़ ही वसूली हो सकी है।
सबसे ज्यादा असर सुगम योजना पर पड़ा है। इससे न तो नए बिजली कनेक्शन जारी हो रहे, न मीटर ही लग रहे। सायं पांच बजे बाद फाल्ट होने पर उसे अगले दिन सही कराने को कहा जा रहा है। ज्यादातर बिजली कर्मियों के फोन सायं पांच बजे बाद बंद जा रहे हैं। बिजली बिल सही कराने पहुंच रहे लोगों के बिल भी ठीक से सही नहीं किए जा रहे। उपभोक्ताओं को टरकाया जा रहा है। एसई देहात विनोद कुमार गंगवार ने बताया कि 117 करोड़ वसूली के सापेक्ष 60 करोड़ की वसूली हुई है। सुबह 10 से तीन बजे तक कार्यालय में काम किया जा रहा है।