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प्रादेशिक सेना के 75 साल: सियाचिन से साइकिल यात्रा पर निकले 21 जवान... 5500 किमी दूरी तय करके पहुंचेंगे आगरा

Thu, 22 Aug 2024 09:39 AM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, आगरा

सार

प्रादेशिक सेना के 75 साल पूरे होने पर 21 जवान सियाचिन से साइकिल यात्रा पर निकले हैं। वह 5500 किमी दूरी तय करके आगरा किला यूनिट पहुंचेंगे। 
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सियाचिन से साइकिल यात्रा पर निकले प्रादेशिक सेना में जवान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रादेशिक सेना के 75 साल पूरे होने के मौके पर सियाचिन से इंदिरा पॉइंट तक 21 जवान 5500 किमी लंबी साइकिल यात्रा पर निकले हैं, जो 23 अगस्त को 801 टीए यूपी के आगरा किला यूनिट पर आएंगे। यहां प्रादेशिक सेना की कमान अधिकारी सैन्य अधिकारियों के साथ साइकिल यात्रा पर आ रहे जवानों का स्वागत करेंगे। अगले दिन 24 अगस्त को आगरा किला के अमर सिंह गेट से साइकिल यात्रा को ग्वालियर के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा।

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9 अक्तूबर 1949 को प्रादेशिक सेना की स्थापना की गई थी। 75 साल पूरे होने के मौके पर प्रादेशिक सेना के 21 जवानों को 30 जुलाई को सियाचिन बेस कैंप से हरी झंडी दिखाकर साइकिल से रवाना किया गया था। वह पूरे देश में 5500 किमी साइकिल चलाकर चेन्नई तक जाएंगे, जहां से टीम अंडमान निकोबार द्वीप समूह के लिए रवाना होगी। निकोबार द्वीप समूह में दक्षिण की ओर इंदिरा प्वाइंट पर इस यात्रा का समापन होगा। 

यहां भारत के सबसे दक्षिणी सिरे पर पानी के नीचे तिरंगा फहराया जाएगा। साइकिल के साथ यह दल नौकायन और स्कूबा डाइविंग भी करेगा। पूरे साइकिल यात्रा रूट पर अपनी सेना को जानें अभियान चलाया जाएगा। आगरा में आगरा किला में तैनात प्रादेशिक सेना के अधिकारी इस दल का स्वागत करेंगे। यमुना एक्सप्रेस वे से साइकिल यात्रा इनर रिंग रोड, फतेहाबाद रोड होते हुए आगरा किला तक पहुंचेगी।



 

सियाचिन से साइकिल यात्रा पर निकले प्रादेशिक सेना में जवान - फोटो : अमर उजाला

92 हजार हेक्टेयर जमीन पर लगाए पौधे

प्रादेशिक सेना अधिनियम 1948 में लाया गया था, जिस पर एक साल बाद 1949 में प्रादेशिक सेना की स्थापना की गई। प्रादेशिक सेना के अधिकारी के रूप में भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी भी सेवाएं दे चुके हैं। वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद अनुराग ठाकुर भी प्रादेशिक सेना में सेवा दे रहे हैं। 
 
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प्रादेशिक सेना ने कई प्रमुख अभियानों में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया है और कई वीरता तथा विशिष्ट पुरस्कार प्राप्त किये हैं। प्रादेशिक सेना अब तक 92 हजार हेक्टेयर जमीन पर 9 करोड़ पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण में भी बड़ी भूमिका निभा रही है।
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