कासगंज। गंगा के जलस्तर में गुरुवार को पांच सेंटीमीटर की कमी आई है। मीडियम फ्लड के हालातों के बाद अब गंगा में लो फ्लड के हालात हैं। हालांकि ग्रामीण इलाकों में भरे बाढ़ के पानी की निकासी नहीं होने के कारण लोगों को परेशानी हो रही है। वहीं 15 दिन से बाढ़ से कटे धरमपुर मार्ग की मरम्मत की सुध भी निर्माण विभाग ने नहीं ली। यह अनदेखी किसी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
जनपद में गुरुवार को गंगा का जलस्तर तो कम हुआ लेकिन गुरुवार को बारिश ने लोगों की दुश्वारियां और अधिक बढ़ा दी। बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों को तमाम मुसीबतें उठानी पड़ी। बाढ़ के कारण छतों पर खाना बनाने वाले लोग बारिश के कारण खाना तक नहीं बना सके। हालात देखते हुए ग्रामीण बेहद परेशान हैं।
लगातार बारिश होने के कारण गंगा में फिर से कभी भी उफान आ सकता है। हालांकि गुरुवार को गंगा में डिस्चार्ज हरिद्वार, बिजनौर एवं नरौरा से कम हुआ है। मीडियम फ्लड के हालात लो फ्लड में आ चुके हैं। बमनपुरा, अजीतनगर, नगला ढाव, सुन्नगढ़ी, किलौनी, किसौल क्षेत्र में बाढ़ का पानी लगातार भरा रहने के कारण खेतों में खड़ी फसलें सड़ने लगी हैं।
ग्रामीणों को लाखों रुपये की क्षति हुई है और प्रशासन से अभी तक कोई राहत की उम्मीद दिखाई नहीं दे रही। किसान जीवराम ने कहा कि उनकी मक्का और बाजरा की फसल पूरी तरह से चौपट हो चुकी है। वहीं नन्नू सिंह ने बताया कि उनके खेतों में भी पानी भरा है। खेतों में क्या बचेगा कुछ कहा नहीं जा सकता।
डिस्चार्ज-
नरौरा- 113321 क्यूसेक
बिजनौर- 67299 क्यूसेक
हरिद्वार- 44420 क्यूसेक
कछला गेज- 163.45 मीटर के निशान पर।
गंगा के जलस्तर में लगातार कमी आ रही है। अब लो फ्लड के हालात हैं। आगामी समय में जलस्तर और कम होने का अनुमान है। जलस्तर कम होने पर प्रभावित क्षेत्र के लोगों को राहत मिलेगी- एके सिंह, सहायक बाढ़ प्रभारी।