मैनपुरी। जिला अस्पताल में रोजाना संक्रामक रोगों से पीड़ितों की संख्या बढ़ रही है। पर, यहां जीवन रक्षक और दर्द निवारक दवाओं के साथ ही सामान्य दवाओं का भी टोटा है। मरीजों की जान बचाने के लिए तीमारदारों को बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
अस्पताल में दवाएं न होने का खामियाजा रोजाना मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। आंकड़ों पर गौर करें तो जिला अस्पताल की ओपीडी में ही प्रतिदिन एक हजार से ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं। भीषण गर्मी के प्रकोप के कारण डायरिया का प्रकोप भी बढ़ा है। पर, डायरिया पीड़ितों को चढ़ाई जाने वाली ड्रिप में मेट्रोजिल और डाइक्लो तक उपलब्ध नहीं हैं। सिर्फ आरएल की बोतल चढ़ाकर काम चलाया जा रहा है।
एंटीबायोटिक के नाम पर एक मात्र डॉक्सी साइकलिन और सेप्ट्रान ही मौजूद है। जबकि लंबे समय से सिफाडेक्सिम एंटीबायोटिक की मांग की जा रही है। ऐसे में मरीजों और उनके तीमारदारों को बाजार से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। वहीं दवाओं के अभाव में अधिकांश मरीजों को सैफई और आगरा रेफर कर दिया जाता है।
जिला अस्पताल में दर्द निवारक दवाएं ही नहीं हैं। डाक्टरों के मुताबिक दर्द के लिए डाइक्लोफेनिक इंजेक्शन बेहद कारगर है, लेकिन यह नहीं है। इसके कारण ज्यादातर मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। इसके अलावा टाइफाइड, घाव सुखाने, बच्चों के उल्टी दस्त, खांसी का सीरप और पेसाब में जलन की भी दवा नहीं है।
दवाओं की बात छोड़िए यहां व्यवस्थाएं भी दुरुस्त नहीं हैं। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में प्रतिदिन घायल व डायरिया आदि के गंभीर मरीज आते हैं। इनके ले जाने के लिए मात्र एक ही स्ट्रेचर है। इसके चलते तीमारदारों को अपने मरीजों को स्वयं गोद में लाना पड़ता है। वहीं बिजली जाने पर जनरेटर भी नहीं चलाया जाता है। कई पंखे भी खराब पड़े हैं।
सीएमएस डा. एके उपाध्याय का कहना है कि आवश्यक जीवन रक्षक और दर्द निवारक दवाओं की उपलब्धता के लिए पत्र लिखा गया है। बजट के अभाव में दवाएं नहीं आ पा रही हैं। कोशिश है कि किसी भी हाल में मरीजों की जीवन रक्षा कर उन्हें बेहतर उपचार दिया जाए।