मैनपुरी। बैनामा कराने के बाद अब दाखिल खारिज कराने में खरीदार को तहसील के चक्कर नहीं लगाने होंगे। तहसील में अब कर्मचारियों को एक महीने के अंदर दाखिल खारिज करना ही होगा। लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जमीन का बैनामा कराने के बाद दाखिल खारिज के लिए बैनामा तहसील में भेजा जाता है। खरीदार को दाखिल खारिज कराने के लिए तहसील के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इससे खरीदार के धन और समय की बर्बादी होती है। आम तौर पर कर्मचारी दाखिल खारिज करने में मनमानी करते हैं। खरीदार अगर अधिकारियों से शिकायत करता है, तो दाखिल खारिज करने में कर्मचारी मनमानी करते हुए संबंधित फाइल को लंबित कर देते हैं।
कभी कम स्टांप तो कभी जगह की पैमाइश में कमी के नाम पर फाइल को लटका देते हैं। अब तहसील के कर्मचारियों को संबंधित बैनामा एक महीने में दाखिल खारिज करना ही होगा। जो कर्मचारी दाखिल खारिज करने में लापरवाही बरतेगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
रजिस्ट्री ऑफिस में बैनामा होने के बाद दाखिल खारिज के लिए संबंधित तहसील में भेजा जाता है। तहसील से खरीदार और बेचने वाले को नोटिस भेजा जाता है। नोटिस का जवाब मिलने पर दाखिल किया जाता है।
दाखिल खारिज करने के लिए समय सीमा तय होने से खरीदारों को लाभ होगा। उनको अब अनावश्यक रूप से तहसील के चक्कर नहीं लगाने होंगे। साथ ही खरीदार के धन और समय की बर्बादी भी रुकेगी।
अनिल राठौर, पूर्व अध्यक्ष बार एसोसिएशन।
रजिस्ट्री ऑफिस से बैनामा आने के बाद तहसील में कर्मचारियों को तय समय सीमा में दाखिल खारिज करना होगा। लापरवाही बरतने पर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
बी राम, एडीएम।