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मोर मुकुट कटि काछनी कर मुरली उर माल...

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बांकेबिहारी मं‌‌दिर। - फोटो : अमर उजाला
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वृंदावन (मथुरा)। मोर मुकुट कटि काछनी कर मुरली उर माल। यहि बानिक मो मन बसौ सदा बिहारीलाल..।। जन-जन के आराध्य ठाकुर बांकेबिहारी महाराज शरद पूर्णिमा पर स्वर्ण रजत सिंहासन पर सुशोभित हुए। प्रभु ने मोर मुकुट, कटि काछनी और वंशी धारण कर भक्तों को निहाल किया। अपने आराध्य की झलक पाने को श्रद्घालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। शरद पूर्णिमा के अवसर पर बांकेबिहारी मंदिर श्वेत वस्त्रों के साथ रंग-बिरंगे गुब्बारों और झालरों से सजाया गया। सुबह राजभोग आरती 12 बजे के स्थान पर 12:55 बजे और शयन भोग आरती 9:30 बजे के स्थान पर रात 10:25 बजे हुई। दर्शनों का समय बढ़ने से भक्तों के आनंद का ठिकाना नहीं रहा। मंदिर सेवायतों ने भक्तों को प्रसाद वितरण किया। ठाकुरजी के दिव्य दर्शन पाकर भक्त निहाल हो गए।
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इसके साथ ही ठाकुर राधा सनेह बिहारी मंदिर में भी शरद पूर्णिमा महोत्सव मनाया गया। ठाकुरजी ने श्वेत वस्त्र धारण कर भक्तों को दर्शन दिए। उधर, रात 10:45 बजे ठाकुर बांकेबिहारीजी के स्वर्ण रजत सिंहासन पर मोर मुकुट, कट काछनी के पुन: दर्शन हुए। वहीं, सुबह श्रद्धालुओं ने यमुना स्नान किया और अपने कार्तिक नियम सेवा का शुभारंभ किया।

खीर और चंद्रकला का लगा भोग
वृंदावन। शरद पूर्णिमा पर जन-जन के आराध्य ठाकुर बांकेबिहारी महाराज को खीर, चंद्रकला और दूध-भात का भोग लगाया गया। सायंकालीन बेला में मंदिर के सेवायतों ने सबसे पहले ठाकुरजी का दूध-भात के साथ ही चंद्रकला और मेवा मिश्रित खीर का भोग लगाया।
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