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गम और गुस्से में नजर आए शहीद के गांव के लोग

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शहीद विक्रम सिंह। - फोटो : अमर उजाला
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छाता (मथुरा)। लाड़पुर गांव के लोग गम और गुस्से में थे। अपने लाल को खोने का गम है तो आतंकियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई न होने का गुस्सा। हर किसी का कहना था कि आतंकियों का सफाया होना चाहिए। सेना को खुली छूट दी जाए। ढूंढ-ढूंढकर आतंकवादियों का मारा जाना चाहिए।
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छाता तहसील का गांव है लाड़पुर। छाता से शेरगढ़ को जाने वाले मार्ग पर यह गांव पड़ता है। इस गांव के कई नौजवान सेना में हैं। जबकि बड़ी संख्या ऐसे युवकों की है जो सेना में जाने की तैयारी कर रहे हैं। भोर होते ही गांव के रास्तों पर दौड़ते हुए वह युवक दिख जाएंगे जो सेना में भर्ती के लिए तैयारी कर रहे हैं।

किसी ने फार्म भरा है तो किसी का फिजिकल के लिए नंबर आ गया है। गांव के करतार सिंह का कहना था कि आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब देने के जरूरत है। इस तरह की कार्रवाई होनी चाहिए कि आगे कोई आतंकी सेना के जवान पर हाथ डालने की हिम्मत न कर सके। खेमचंद्र का कहना था कि जवानों को छूट नहीं दी जा रही है। सेना को आतंकियों के सफाए के लिए छूट दी जाए।
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राष्ट्रीय रायफल्स में थे विक्रम सिंह
छाता। विक्रम सिंह राष्ट्रीय रायफल्स (आरआर) की मैगनाइट यूनिट में थे। एक जनवरी 2012 को उन्होंने ज्वाइन किया था। जो बताया गया है उसके मुताबिक रविवार की रात को विक्रम सिंह समेत आठ लोग ड्यूटी कर रहे थे। इसी दौरान आतंकियों से मुठभेड़ हुई है।
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