आगरा। डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में वर्ष 2013 में हुए बीएड मार्कशीट में फर्जीवाड़े की परतें जल्द खुल सकती हैं। कमरे में सील कापियों की विशेष निगरानी में स्क्रीनिंग कराई जा रही है। इससे पता चलेगा कि गड़बड़ी किस स्तर पर की गई। विश्वविद्यालय प्रशासन मूल उत्तर पुस्तिकाआें के आधार पर फिर से परिणाम तैयार कराना चाह रहा है।
बीएड वर्ष 2013 में हुए फर्जीवाड़े में विश्वविद्यालय के कर्मचारी से लेकर अधिकारी तक सवारों के घेरे में आए थे। इसका मुद्दा कोर्ट पहुंचा और विधानसभा में भी सवाल उठा था। कालेजों की मिलीभगत से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राआें को बीएड परीक्षा में गलत तरीके अधिक अंक प्रदान किए गए। कुछ छात्र अंक तालिका संशोधन कराने पहुंचे तो मामला पकड़ में आया। कापी में कुछ, क्रॉस लिस्ट में कुछ और अंक तालिका में कुछ और नंबर थे। बहुत सारे ऐसे मामले आए।
इस मामले में बहुत सारे लोग फंसेंगे। लगातार मामले को दबाने की कोशिश जाती रही। अक्तूबर 2016 में कापियाें की स्क्रीनिंग के लिए कर्मचारियों को संबद्ध किया गया था। कार्य पूरा नहीं हो सका। अब दोबारा कापियों का सत्यापन कराया जा रहा है। इसके लिए अलग से कर्मचारी लगाए गए हैं। रोजाना विशेष निगरानी में कमरों की सील खोली और बंद की जा रही है।
विश्वविद्यालय कुलसचिव केएन सिंह का कहना है कि विशेष निगरानी में बीएड की कापियों की स्क्रीनिंग कराई जा रही है। सभी लंबित मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया के तहत ऐसा किया जा रहा है।
ये देखा जाएगा
कापियों के मुख्य पृष्ट पर दिए गए अंक, अंदर दिए गए अंकों के योग के आधार पर हैं या नहीं। क्रॉस लिस्ट में चढ़े अंक और मूल कापी के अंक समान हैं या नहीं। कुछ छात्रों की मार्कशीट से भी मिलान किया जाना है।