'सिम' के काले कारोबार का मामला सामने आया है। आरोपी आगरा में सिम खरीदकर दुबई और थाईलैंड के अपराधियों को सप्लाई करते थे। इससे वह करोड़ों में खेलते और ऐशो आराम की जिंदगी जीते। पुलिस ने तीन महिलाओं सहित 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
उत्तर प्रदेश के आगरा में सोमवार को कमिश्नरेट पुलिस ने अंतर्राष्ट्रीय साइबर ठग गैंग का पर्दाफाश किया है। किरावली स्थित महुअर कट से सोमवार को 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। वह दुबई और थाईलैंड में सक्रिय साइबर ठगों के लिए आगरा से सिम खरीदकर दिल्ली के सप्लायरों को देते थे। इसके बाद केरल का सरगना सिम विदेश में ठगों को उपलब्ध कराता था। साइबर ठग लोगों से रिवार्ड प्वाइंट दिलाने, इनाम दिलाने, आनलाइन गेमिंग के दौरान साइबर ठगी करते थे। आरोपी फर्जी आईडी से खुलवाए खातों में रकम डलवा लेते थे।
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डीसीपी पश्चिमी जोन सोनम कुमार ने बताया कि पुलिस को जानकारी मिली थी कि आगरा में फर्जी आईडी से खरीदे सिमों को बेचने वाला गैंग सक्रिय है। इस सूचना पर पुलिस टीम को लगाया गया। सोमवार को महुअर कट से 7 लोग पकड़े गए। उनकी निशानदेही पर ड्रीम सिटी कालोनी में किराये के मकान में 3 महिलाएं भी पकड़ी गईं। महिलाओं से वोडाफोन और एयरटेल के 420 सिम और अन्य उपकरण बरामद किए गए।
डीसीपी ने बताया कि पूछताछ में पता चला कि पकड़े गए आरोपी फरह, मथुरा के अभय, भोला, गोविंद, आशीष, हर्ष, बृजेश, आगरा के सेवला निवासी अंकुश, दीपक, सौरभ, सोनू, शिवम, सचिन, देवेंद्र, वीरू और पंकज से 50 रुपये वाला सिम 500 रुपये में खरीदते हैं। वह सिम को चालू करके देते हैं। इन सिम को बंटी के माध्यम से दिल्ली के जाफराबाद निवासी यूसुफ और हफीज को 1500 रुपये में बेच देते हैं। केरल का शानू दिल्ली से दुबई और थाईलैंड सिमों को फ्लाइट से ले जाता है। इनको अपने गिरोह के मुख्य सरगना को बिक्री कर देता है।
दुबई में एयरटेल तो थाईलैंड में चल रही वोडफोन की सिम
डीसीपी ने बताया कि आरोपी एयरटेल और वोडाफोन की सिम ही अंतर्राष्ट्रीय ठगों को सप्लाई करते थे। एयरटेल की सिम दुबई में सक्रिय रहती है, जबकि थाईलैंड वोडाफोन कंपनी के सिम चल जाती है। इसका ही फायदा ठग उठा रहे थे। वह काल करते थे। लोग नंबर भारत का ही समझते थे। वह झांसे में आ जाते थे। ठगी होने पर पुलिस को ठग नहीं मिलते थे। लोकेशन भी नहीं निकल पाती थी। फर्जी खाते और सिम होने की वजह से आरोपी नहीं पकड़े जा रहे थे। पुलिस अब आगरा, मथुरा, दिल्ली और केरल के सप्लायरों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
एक के बहाने जारी कराते थे 5 सिम
पुलिस ने जिन सप्लायरों को आगरा से गिरफ्तार किया है, वह शहर में जगह-जगह कैनोपी लगाकर सिम बेचने वाले लोगों के संपर्क में रहते थे। कैनोपी पर सिम खरीदने आने वाले कम पढ़ लिखे लोगों से विक्रेता बहाने से 4-5 बार बायोमैट्रिक के दौरान 4 से 5 सिम जारी करा लेते थे। लोगों को 1 सिम देते थे, जबकि बाकी सिम आरोपी अपने पास रखते थे। इन्हें सिम सप्लायर गैंग को बेच दिया जाता था।
फर्जी फर्म बनाकर खुलवाते थे चालू खाता
पुलिस ने 3 सप्लायरों की पत्नियों को भी गिरफ्तार किया है। वह भी गैंग में सक्रिय भूमिका निभा रही थीं। महिलाओं ने अपने नाम से फर्जी फर्म बना रखी थी। इस फर्म के नाम से बैंक से चालू खाता खुलवाती थीं। इन खातों के पासबुक, डेबिट कार्ड आदि की जानकारी विदेश में बैठे साइबर ठगों को दे दी जाती थी। वह साइबर ठगी से आने वाली रकम को इन खातों में जमा कराते थे। इसके बाद आनलाइन अपने खातों में ट्रांसफर कर लेते थे। ठगी की शिकायत पर पुलिस को आरोपियों की लोकेशन और खाते की जानकारी फर्जी मिलती थी।
इनकी हुई गिरफ्तारी
पुलिस ने किरावली के मोहल्ला पठान निवासी शाहरुख, इंदौर के भालया कालोनी निवासी गौतम व उसकी पत्नी, हरियाणा के नूंह निवासी तोहीद खान व उसकी पत्नी, फतेहपुर सीकरी के रोहित कुरैशी, शहबाज खान व उसकी पत्नी, एत्माद्दौला स्थित दुर्गा नगर निवासी दुर्गेश कुमार और काजीपाड़ा निवासी आदित्य को गिरफ्तार किया है।