जी हां, जिला प्रशासन की त्रासदी में लापता लोगों की जारी लिस्ट यही जाहिर करती है। सरकारी लिस्ट में मात्र 22 लोग लापता हुए हैं।
इनमें भी कुछ नाम कानपुर, उन्नाव और पीलीभीत के हैं। लखनऊ से लापता लोगों का आंकड़ा अब भी 100 से ज्यादा है, जिनके परिजन बेसब्री से उनका इंतजार कर रहे हैं।
जारी की 22 लोगों की लिस्ट
जिला प्रशासन ने बुधवार को लापता लोगों की लिस्ट जारी की है। सूची में केवल 22 नाम दर्ज हैं। इसमें इंदिरा नगर के राजकुमार मल्होत्रा के कानपुर के रिश्तेदार सहित सात लोग हैं।
इनके नाम ही नहीं...
लिस्ट में उन्नाव और पीलीभीत के लोगों के नाम हैं। हालांकि, अपने परिवार को खोने वाले इंदिरा नगर के धनंजय मिश्रा, राजाजीपुरम निवासी अनुराग मिश्रा के साथ गए 18 सदस्यीय दल, मर्दन खेड़ा के आशीष शर्मा के परिवार का नाम लिस्ट में शामिल नहीं है।
यहां टूटने लगी हैं उम्मीदें
अपनों का इंतजार कर रहे इन परिवार वालों को प्रशासन से जो उम्मीद थी, वो लिस्ट देखकर खत्म सी होने लगी है। उनका कहना है कि प्रशासन ने दावा किया था कि लखनऊ के लापता लोगों को ढूंढा जाएगा, लेकिन उसकी लिस्ट में नाम तक दर्ज नहीं है तो प्रशासन से उम्मीद करना ही बेमानी है।
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वहीं, जिनके नाम लिस्ट में शामिल हैं उनके परिवार वालों को भी कोई राहत भरी खबर नहीं मिली है।
उधर, राहत कार्य से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इन सभी लोगों की तलाश के लिए उत्तराखंड सरकार के अलावा दूसरे जिलों के प्रशासन की मदद ली जा रही है।
पर यहां उम्मीद अब भी कायम
सैलाब में गुम हुए अपनों की तलाश में परिवार वाले अब भी जुटे हैं। चारों ओर बिखरी पड़ी लाशों में भी एक आशा की किरण लोगों को अपने परिजनों के जिंदा होने की दिलासा दे रही है। राजधानी से गए कई लोग अब भी जॉलीग्रांट से गौरीकुंड तक अपनों को ढूंढने में जुटे हैं।
यहां सिर्फ दर्द बहता है आंखों से...
केस 1- अपनी बहन के पूरे परिवार को खोने वाले अभय श्रीवास्तव का कहना है कि पहले सूची में नाम होने पर भांजी आकृति उर्फ धैर्या के जिंदा होने की आशा जगी थी।
केस 2-इंदिरा नगर निवासी परिवार के बाकी सदस्य धनंजय श्रीवास्तव, सुनीता श्रीवास्तव, भांजा आदि और सास-ससुर सुरेश श्रीवास्तव, कामिनी श्रीवास्तव की भी जानकारी नहीं मिल सकी।
अब देहरादून में एक रिश्तेदार के दोस्त ने फोटो पहचान कर गौरीकुंड में बहनोई के एक युवक के साथ मिलने की बात बताई। उसके मुताबिक, उनके काफी चोट थी। इसके बाद से उनका कोई पता नहीं चल सका है।
बुधवार को परिवार गौरीकुंड से तलाश कर वापस लौटा। ऑनलाइन हेल्पलाइन से लेकर उत्तराखंड के हर अस्पताल और शिविर में उनका परिवार तलाश कर चुका है।
केस 3-राजाजीपुरम् निवासी संतोष रस्तोगी भी अपने पिता अयोध्या प्रसाद रस्तोगी और मां हंशमुखी देवी की तलाश में उत्तराखंड में हैं।
... और नहीं मिली मां
भूखे पेट, पैरों में सूजन और छाले लिए आशीष बुधवार को घर वापस लौट आया। 14 दिन तक मां की तलाश में रात-दिन वह उत्तराखंड के पहाड़ों और राहत शिविरों में भटकता रहा। जनता नगरी निवासी माया मिश्रा पत्नी अशोक कुमार मिश्रा की तलाश में उनका बेटा उत्तराखंड गया हुआ था।
दामाद संतोष शुक्ला ने बताया कि आखिरी बात आशीष की मां से 16 जून को दिन में हुई। इसके बाद से उनकी कोई जानकारी नहीं मिली।
वह उस समय केदारनाथ के दर्शन करके करीब तीन किमी नीचे आ गई थीं। मां के नहीं मिलने की खबर से पूरा परिवार गमगीन है। माया के साथ आशीष की छोटी बहन पूनम द्विवेदी, ससुर रामशरण द्विवेदी, सास पुष्पा त्रिवेदी सभी निवासी अमेठी भी लापता हैं।