एसिड अटैक के दोषी को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। सोमवार को सजा का आदेश अपर सत्र न्यायाधीश कृष्ण यादव ने दिया। बहेड़ी थाना क्षेत्र के डंडिया नवायल निवासिनी रामबेटी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 23 जुलाई, 2003 की रात वह अपने पति नरेश कुमार, दस साल के बेटे शिवम, सात साल के विक्की, तीन साल की बेटी दीक्षा के साथ घर के आंगन में सो रही थी।
करीब 10 बजे नरेश और शिवम के ऊपर कोई तरल पदार्थ गिरा। उसके छींटें रामबेटी के ऊपर भी आए। इससे सभी लोग हड़बड़ाकर उठ बैठे, तभी छत से फिर तरल पदार्थ फेंका गया। रामबेटी ने ऊपर जाकर देखा तो वहां उनके जेठ उमेश अपने दो लड़कों के साथ हाथ में बाल्टी लिए खड़े थे और कह रहे थे कि आज तेजाब से जलाकर सभी को मार डालेंगे। तेजाब पड़ने से रामबेटी, नरेश और उनके बच्चों का शरीर बुरी तरह जल गया।
सभी के चेहरे खराब हो गए। जेठ उमेश ने बंटवारे की रंजिश में वारदात को अंजाम दिया। इलाज के दौरान नरेश की मौत हो गई। पुलिस ने तीनों अभियुक्तों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया गया। उमेश के दोनों लड़कों का मुकदमा अलग कर दिया गया। अभियोजन की ओर से सरकारी वकील ज्ञानेंद्र श्रीवास्तव ने कुल 12 गवाह पेश किए। अदालत ने अभियुक्त उमेश चंद्र को दोषी ठहराते हुए उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही 7 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।