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लोहिया इंस्टीट्यूट में आग की अफवाह से हड़कंप

Mon, 29 Jul 2013 05:33 AM IST
Lucknow
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लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आरएमएलआईएमएस) में रविवार को न्यूरो सर्जरी वार्ड में आग की अफवाह से हड़कंप मच गया। हॉस्पिटल बिल्डिंग के सेकेंड फ्लोर पर स्थित वार्ड में अचानक गैस लीक होने की आवाज आने लगी। इस पर वहां मौजूद नर्सें आग-आग चिल्लाते हुए गार्ड और फायर फाइटर को बुलाने के लिए नीचे भागीं। आग-आग का शोर सुनकर वार्ड में मौजूद तीमारदार परेशान हो गए और अफरातफरी मच गई। लोग अपने मरीजों को लेकर भागने लगे। हालांकि किसी ने ये देखने की कोशिश नहीं की कि आवाज कहां से आ रही है। इसी बीच गार्ड और इलेक्ट्रीशियन वहां पहुंच गए। उन्होंने जांच के बाद बताया कि सेंट्रल ऑक्सीजन सिस्टम की नोजल टूटने से गैस लीक हो रही थी।
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रविवार शाम करीब 4:45 बजे न्यूरो सर्जरी वार्ड में नर्सिंग केबिन के पास स्थित काउंटर से अचानक गैस लीक होने की आवाज आने लगी। आवाज इतनी तेजी थी कि वहां ड्यूटी पर मौजूद नर्सें घबरा गईं और आग-आग चिल्लाते हुए सुरक्षा कर्मियों को बुलाने के लिए बाहर भागीं, जबकि एक नर्स अस्पताल में तैनात फायर फाइटर को फोन मिलाया। फोन नहीं मिला तो वो भी वार्ड से बाहर भागी। नर्सों के आग-आग चिल्लाते हुए बाहर भागने से वार्ड में भर्ती मरीज और उनके परिवारीजन भी घबरा गए। स्पाइन और मस्तिष्क की सर्जरी करा चुके गंभीर मरीजों की जान बचाने के लिए लोग बेड सहित वार्ड से बाहर भागने लगे। कुछ लोगों ने अपने मरीजों को गोद में उठा लिया तो कुछ ने बेड पर बिछी चादर के सहारे ही अपने मरीज को उठाकर बाहर निकाला। द्वितीय तल पर स्थित वार्ड से मरीजों को नीचे ले जाने के लिए लिफ्ट के सामने भीड़ लग गई। वहीं कुछ मरीजों को घरवाले उन्हें गोद में लेकर सीढ़ियों के रास्ते भागे। इसी बीच, वार्ड में सुरक्षा गार्ड, फायर फाइटर और इलेक्ट्रीशयन पहुंच गए। उन्होंने गैस लीक की आवाज आने के कारणों की जांच की तो पता चला कि सेंट्रल ऑक्सीजन सिस्टम में लगे नोेजल के टूट जाने से तेजी से गैस निकल रही थी। उसी की आवाज से वहां मौजूद नर्स गलतफहमी का शिकार हो गई और बिना सोचे-समझे आग-आग चिल्लाते हुए बाहर भागी। इससे मरीज और उनके तीमारदार भी दहशत में आ गए। इलेक्ट्रीशियन ने टूटे हुए नोजल को रिपेयर कर गैस लीक को बंद कर दिया।

बाहर निकलने की होड़ में मरीज हुए बेहाल
लोहिया इंस्टीट्यूट के जिस भवन में ये भगदड़ मची, वो सात मंजिला है। अलग-अलग तल पर वार्ड, पैथोलॉजी लैब आदि बनाए गए हैं। द्वितीय तल पर 20 बेड का न्यूरो सर्जरी वार्ड है। इसमें भर्ती ज्यादातर मरीज नि:शक्त होते हैं और बिना मदद एक घूंट पानी भी नहीं पी सकते। रविवार को जब हड़कंप मचा तब भी वार्ड मरीजों से पूरी तरह से फुल था। गर्दन व रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क की सर्जरी के मरीज वहां भर्ती थे। अचानक मची अफरातफरी के बाद मरीजों को लेकर तीमारदार भागने लगे। कुछ लोग बिस्तर सहित मरीजों को लेकर भागे, जिससे लिफ्ट के सामने का स्थान पूरी तरह से ब्लॉक हो गया। कई मरीजों को उनके परिवारीजन न चाहते हुए भी सीढ़ी के रास्ते नीचे लेकर भागे। गले में कॉलर लगाए जिन मरीजों को हिलने के लिए भी मना किया गया है, उनकी जान बचाने के लिए सीढ़ियों के रास्ते नीचे उतारना पड़ा। स्थिति सामान्य होने में एक घंटा लगा।
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नर्सों से हुई कहासुनी
आग लगने की आपाधापी के बीच लगभग सभी मरीज वार्ड से बाहर निकल गए थे, लेकिन बेड नंबर 11 पर भर्ती एक मरीज को बाहर नहीं निकाला जा सका। मरीज और उसके साथ मौजूद महिला वार्ड में ही फंसे रहे। जब वार्ड में मरीज वापस आ गए तो महिला ने वहां मौजूद नर्स को फटकारना शुरू कर दिया। महिला ने नर्स से कहा कि उसकी जिम्मेदारी मरीजों को सही सलामत रखने की है न कि खुद जान बचाकर भागने की। काफी देर तक महिला और नर्स में कहासुनी होती रही। महिला ने नर्स की शिकायत डॉक्टर से करने की धमकी तो नर्स ने मरीज को डिस्चार्ज करा देने की। इसके बाद वहां मौजूद लोगों ने बीच-बचाव कर दोनों को शांत कराया।
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