लखनऊ। नर्स, डॉक्टर और टेक्नीशियन दूषित खून से सबसे ज्यादा संक्रमित हो रहे हैं। इसलिए जरूरी है कि एचआईवी, हेपेटाइटिस जैसी दूषित खून से होने वाली बीमारियों से बचने के लिए सभी जरूरी उपाय अपनाए जाएं। इसके लिए सभी संस्थानों और अस्पतालों को कड़े कदम उठाने होंगे। संजय गांधी पीजीआई में आयोजित ‘प्रिवेंशन ऑफ हिपेटाइटिस इन ट्रांसफ्यूजन’ विषय पर आयोजित सतत् चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम के तहत गैस्ट्रोइंट्रोलॉजिस्ट डॉ. समीर महेंद्रा ने ये जानकारी दी।
डॉ. महेंद्रा ने बताया कि एक शोध के अनुसार 40 फीसदी नर्सें, 28 फीसदी डॉक्टर और 15 फीसदी टेक्नीशियन रक्त से होने वाले संक्रमण के शिकार हो रहे हैं। ये संक्रमण उन्हें मरीज को इंजेक्शन लगाते समय, त्वचा में किसी घाव पर दूषित खून लगने के कारण हो सकता है। उन्होंने बताया कि शोध में पाया गया है कि हेल्थ प्रोफेशनल को दूषित खून से 0.3 फीसदी एचआईवी, तीन फीसदी हेपेटाइटिस सी और 30 फीसदी हेपेटाइटिस बी वायरस से संक्रमित हुए हैं। स्वास्थ्यकर्मियों को इस संक्रमण से बचाने का सबसे आसान उपाय टीकाकरण है। ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के प्रो. धीरज खेतान ने बताया कि टीकाकरण से 99 फीसदी तक संक्रमण से बचा जा सकता है। हेल्थ प्रोफेशनल को भी काम करते समय एहतियात बरताना चाहिए। सुई को दोबारा उपयोग में नहीं लेना चाहिए। हमेशा ग्लब्स पहन कर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्थायी कर्मचारियों का तो टीकाकरण हो जाता है, लेकिन संविदा पर तैनात कर्मचारियों को टीका नहीं मिल पाता है। उन्हें भी नि:शुल्क टीकाकरण की व्यवस्था करनी चाहिए। इस मौके पर पीजीआई ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग के हेड प्रो. राजेंद्र चौधरी, आएमएलआईएमएस की डीन प्रो. नुजहत हुसैन, पीजीआई गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग के हेड प्रो. विवेक सारस्वत, डॉ. अभय वर्मा, डॉ. अमित गोयल, सीएमएस प्रो. पीके सिंह, प्रो. राकेश अग्रवाल आदि मौजूद थे।