लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के रिजल्ट ने इस बार छात्रों के पसीने छुड़ा दिए हैं। स्नातक कक्षाओं के कई छात्र इस बार फेल हुए हैं। खासकर बीएससी द्वितीय वर्ष में सांख्यिकी और कंप्यूटर साइंस में तो छात्रों को जीरो नंबर तक मिले हैं। जानकारों की मानें तो इस बार लविवि में कॉपियां जांचने में जितनी सख्ती हुई है, उतनी पहले कभी नहीं हुई। इसका सबसे बड़ा कारण छात्रों को सूचना के अधिकार के तहत कॉपियां देखने की छूट मिलना और पूर्व कुलपति जी पटनायक द्वारा केंद्रीय मूल्यांकन कक्ष में सीसीटीवी कैमरे लगवाया जाना है। पूर्व कुलपति ने स्नातक कक्षाओं में डिग्री कॉलेजों के परीक्षा केंद्र भी बदलवाए थे और एक-दूसरे कॉलेज में छात्रों के परीक्षा केंद्र होने से नकल पर भी काफी हद तक अंकुश लग गया। ऐसे में अब जो रिजल्ट निकल रहे हैं, उसमें काफी छात्र फेल हुए हैं।
शिया पीजी कॉलेज में बीएससी द्वितीय वर्ष के छात्रों को कंप्यूटर साइंस के पहले पेपर में जीरो और एक नंबर तक मिले हैं। छात्र शिवांग मिश्रा, मो. अजीम, मनीष पांडेय और सुधीर कुमार को जीरो नंबर मिले। इसी तरह सांख्यिकी में भी रिजल्ट अच्छा नहीं गया। उधर, डीएवी पीजी कॉलेज में भी गणित व सांख्यिकी में छात्रों को बहुत कम अंक मिले हैं। बीकॉम द्वितीय वर्ष और बीएससी तृतीय वर्ष में भी छात्रों को काफी कम-कम नंबर मिले हैं। कालीचरण पीजी कॉलेज में बीकॉम द्वितीय वर्ष के छात्रों को भी बहुत ज्यादा नंबर इस बार नहीं मिले हैं। लविवि में भी पढ़ने वाले बीकॉम व बीएससी के छात्रों को अच्छे नंबर नहीं मिले हैं। छात्रों का आरोप है कि उनकी कॉपियां ढंग से जांची गईं होतीं तो ऐसा न होता। दूसरी ओर जानकारों की मानें तो कॉपियां ठीक से जांची जा रही हैं। अब छात्र सूचना के अधिकार के तहत कॉपियां देखने की तैयारी कर रहे हैं। लविवि के परीक्षा नियंत्रक प्रो. अकील अहमद कहते हैं कि कॉपियां पूरी पारदर्शिता के साथ जांची गई हैं। छात्र चाहें तो सूचना के अधिकार के तहत कॉपी देख सकते हैं। पढ़ने वाले तमाम छात्रों को अच्छे नंबर भी मिले हैं।
मूल्यांकन के साथ सख्ती से लें कक्षाएं
लविवि में पिछले सत्र में शिक्षकों की उपस्थिति का ब्यौरा लेना पूर्व कुलपति जी पटनायक ने शुरू किया तो खलबली मच गई थी। कई शिक्षक जो लंबे समय से कक्षाएं लेने नहीं आते थे, वे भी कक्षाओं में पहुंचने लगे। सभी कक्षाएं भी लगने लगीं। इससे पढ़ाई का बेहतर माहौल बना। छात्र भी पढ़ने आने लगे मगर धीरे-धीरे सबकुछ फिर पुराने ढर्रे पर लौट आए। फेल हुए छात्रों का कहना है कि अगर कॉपियां जांचने में इतनी सख्ती करते हैं तो पढ़ाते समय भी शिक्षक रेगुलर रहें।
70 प्रतिशत उपस्थिति का नियम भी ढंग से लागू नहीं
लविवि और डिग्री कॉलेजों में 70 प्रतिशत उपस्थिति वाले छात्रों को ही परीक्षा में बैठने का मौका देने वाला नियम कागजी ही है। बड़ी संख्या में छात्र कक्षाओं में नहीं आते और जब परीक्षाएं होती है,ं तभी वे कॉलेज या विवि पहुंचते हैं। कई कॉलेजों के प्राचार्य यह स्वीकार करते हैं कि छात्रों की कक्षा में उपस्थिति बहुत कम होती है। डीएवी पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राम विशाल त्रिपाठी कहते हैं कि हम छात्रों को प्रयोगात्मक कक्षाओं में बुलाने के लिए भी सख्ती करते हैं। छात्रों का बस चले तो वह सीधे परीक्षा में ही पहुंचे।
... और अब कॉपी जांचने नहीं आ रहे गुरुजी
लविवि में कॉपी जांचने के लिए कई गुरुजी मशहूर हो चुके थे। उन्हें एक दिन में 80-80 कॉपियां जांचने का अनुभव था मगर जब से आरटीआई लागू हुआ है और विवि के केंद्रीय मूल्यांकन कक्ष में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, ये गुरुजी घर बैठ गए। अभी जो शिक्षक कॉपियां जांच रहे हैं, वे भी काफी ध्यान दे रहे हैं। यही वजह है कि इस बार मूल्यांकन का काम जल्दी शुरू हुआ था और कॉपियां देर तक जंचती रहीं।