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हर घंटे 34 किमी की रफ्तार से दौड़ेगी मेट्रो

Fri, 28 Jun 2013 05:30 AM IST
Lucknow
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लखनऊ। स्टोपज टाइम मिला कर मेट्रो रेल की रफ्तार 34 किमी प्रति घंटा होगी। हर किमी पर करीब दो मिनट का स्टापेज को मिला कर यह स्पीड होगी। यानी कि ट्रैक पर ट्रेन करीब 45 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेगी। कैबिनेट की मीटिंग में डीपीआर को रखा गया, जिसमें यह रफ्तार भी बताई गई। डीएमआरसी ने जो डीपीआर बनाई है, उसके मुताबिक पहले चरण में नार्थ साउथ कॉरिडोर में रफ्तार 34 किलोमीटर प्रति घंटा होगी जबकि ईस्ट वेस्ट कॉरिडोर में यह रफ्तार 32 किमी प्रति घंटा रह जाएगी। योजना के तहत सबसे पहले नार्थ साउथ कॉरिडोर का ही संचालन किया जाना है।
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मेट्रो रूट पर घंटे में 2200 वाहनों का आवागमन ः पूर्व में डीएमआरसी ने पीक आवर्स में प्रति घंटा सड़क पर चलने वाले वाहनों का सर्वे किया था। सर्वे में पाया गया था कि राजधानी में मेट्रो के लिए तय रूट पर प्रत्येक घंटे करीब 1900 वाहन गुजरते हैं। इन्हीं वाहनों की संख्या को कम करना ही मेट्रो रेल नेटवर्क का उद्देश्य है। यह सर्वे डीएमआरसी ने दो तीन साल पहले डीपीआर बनाने के दौरान किया था। अब इस सर्वे को नए सिरे से करवाया जाएगा। फिलहाल, पीक आवर्स में प्रति घंटा करीब 2200 वाहन गुजरते हैं। इनकी संख्या अगले तीन साल में 2300 से 2400 के बीच होगी। इससे सड़क पर कार के गुजरने की रफ्तार 18 से 20 किमी के बीच रह जाएगी। ऐसे में अगर मेट्रो रेल 34 किमी की रफ्तार से दौड़ेगी तो वह कार चालकों को कार छोड़ने पर मजबूर कर देगी। मेट्रो रेल में चलने वाले लोग गंतव्य तक कार चालकों के मुकाबले 50 फीसदी कम समय में पहुंचेंगे। उदाहरण के तौर पर अगर आपको हजरतगंज से आईटी क्रॉसिंग पहुंचने के लिए कार से 15 मिनट का समय लगता है, तो मेट्रो से यह समय घट कर आठ मिनट रह जाएगा।
राज्य सरकार के 1100 करोड़ से होगा आगाज ःराजधानी में मेट्रो रेल निर्माण और संचालन के लिए एजेंसियों से ऋण लेने में कम से कम एक साल का वक्त लगेगा। इसलिए बहुत जल्द ही ढांचागत निर्माण सरकारी मदद के हिस्से कर दिया जाएगा। ताकि बहुत जल्द ही निर्माण हो सके। इसके बाद में एजेंसियों की ऋण लेने की कवायद तेज कर दी जाएगी और इसके आगे का पोर्शन लोन के जरिये बनाया जाएगा। राज्य सरकार की मेट्रो के लिए अपने हिस्से का 1100 करोड़ रुपये खर्च करेगी। पहले चरण में अमौसी से मुंशी पुलिया तक करीब 23 किलोमीटर मेट्रो रूट पर निर्माण के लिए करीब 5400 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इसमें 20 फीसदी केंद्रीय मदद और 20 फीसदी राज्य सरकार की मदद और बाकी 60 फीसदी एजेंसियों से ऋण लेकर काम चलाया जाएगा। ऋण लेना एक लंबी प्रक्रिया है, जिसमें करीब एक साल का समय लगेगा। इसलिए मेट्रो का निर्माण एक साल के लिए तो नहीं टाला जा सकता। ऐसे में राज्य सरकार के 20 फीसदी हिस्से यानी करीब 1100 करोड़ रुपये से निर्माण का आगाज करना होगा।
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डीएमआरसी बनाएगा मेट्रो डिपो का डिजाइन ः 32वीं वाहिनी पीएसी सरोजनी नगर में मेट्रो के मदर डिपो के लिए जमीन तय की गई है। इस भूमि का लीज प्लान डीएमआरसी को भेजा जाएगा। इसके आधार पर डीएमआरसी डिपो को डिजाइन करेगा, जिसके बाद मेट्रो रेलखंड निर्माण के साथ डिपो का भी निर्माण किया जाएगा। जिला प्रशासन ने 32वीं वाहिनी पीएसी के पास मेट्रो मदर डिपो के लिए 80 एकड़ जमीन फाइनल कर दी है। इस भूमि में 50 एकड़ पर डिपो बनेगा, जबकि 30 एकड़ का इस्तेमाल लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन अन्य सुविधाओं को विकसित करने के लिए करेगी। मेट्रो रेल के निर्माण से लेकर उसके संचालन तक इस स्थान का इस्तेमाल बतौर यार्ड किया जाएगा।
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