लखनऊ। लखनऊ इलेक्ट्रिक सप्लाई अथॉरिटी (लेसा) उपकेंद्र ऑपरेटरों की लापरवाही के चलते एक और संविदा कर्मचारी की मौत हो गई। दस दिन के भीतर यह दूसरी दुर्घटना है जब संविदा कर्मचारी की पोल से गिरकर मौत हो गई। उस पर लेसा के ठेकेदारों ने संविदा कर्मी को देखना भी उचित नहीं समझा। सूचना देने के बावजूद ठेकेदार न तो घायल संविदा कर्मी को देखने अस्पताल पहुंचा और न ही मरने के बाद पोस्टमार्टम हाउस। इसके विरोध में परिजनों ने शनिवार को मृतक का शव उपकेंद्र पर रखकर प्रदर्शन किया। दुबग्गा उपकेंद्र पर संविदा कर्मचारी के रूप में कार्यरत मनोज कुमार (30) पुत्र अयोध्या प्रसाद निवासी बरावन कला शुक्रवार की रात दस बजे बिजली आपूर्ति में आई बाधा को दूर करने के लिए बरीकला गांव गया था। पांच कर्मियों के दल में मनोज कुमार डबल पोल पर चढ़कर काम कर रहा था। मृतक के भाई अशोक एवं चंदन के मुताबिक मनोज 11 केवी फीडर को जैसे ही जोड़ने लगा वैसे ही जोरदार धमाके के साथ झुलसकर नीचे आ गिरा। साथ के कर्मचारियों ने एसडीओ एवं जूनियर इंजीनियर को घटना की सूचना दी और मनोज को पास के एक निजी अस्पताल ले गए। यहां से बाद में सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन उपचार के दौरान रात को ही मनोज ने दम तोड़ दिया। मनोज ठेकेदार शाहिद का संविदा कर्मचारी था। अशोक एवं चंदन ने बताया कि ठेकेदार को साथ काम करने वाले कर्मचारियों ने मनोज के पोल से गिर जाने की सूचना दी, लेकिन ठेकेदार ने न तो अस्पताल पहुंचना मुनासिब समझा और न ही पोस्टमार्टम हाउस आना। एक्सईएन पीआर चौधरी ने बताया कि ठेकेदार शाहिद को बुलाया गया है, जिससे मनोज के परिजनों को आर्थिक मदद के रूप में एक लाख रुपये दिए जा सके। इससे पहले 12 जून को भी उतरेठिया उपकेंद्र पर ऑपरेटर की लापरवाही के चलते संविदा कर्मचारी शैलेंद्र यादव झुलस गया था।
1.50 लाख की आर्थिक सहायता ः परिजनों ने मनोज कुमार के शव को उपकेंद्र पर रखकर प्रदर्शन किया। एक्सईएन पीआर चौधरी ने मृतक के पिता अयोध्या प्रसाद को ठेेकेदार से 1.50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिलाने के साथ ही 20 हजार रुपये अंतिम संस्कार के लिए दिए। साथ ही परिवार के एक सदस्य को संविदा पर नौकरी देने का आश्वासन दिया। इसके बाद परिजनों ने शव को हटाया और अंतिम संस्कार करने ले गए।